Jan 25, 2017

पति आपके गुलाम हैं, हम नहीं, नाइंसाफी हुई तो करेंगे शिकायत





पति उनके गुलाम हैं हम नहीं है। यदि उनके साथ नाइंसाफी हुई तो मीडिया के सामने रेल प्रशासन की पोल खोलेंगी।


बिलासपुर, नईदुनिया न्यूज। रनिंग रूम में दाल के नाम पर पानी और सड़ी-गली सब्जियां परोसी जाती है। अच्छी क्वालिटी के आटे को एक किनारे रख घटिया आटे से बनी रोटियां खिलाई जाती है। व्यवस्था सुधारने चालक या सहायक जब रेल प्रशासन की इन खामियों को उजागर करने का साहस करें तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। उनके इस तानाशाह रवैए को पति (रनिंग स्टॉफ) बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन हम नहीं। पति उनके गुलाम हैं हम नहीं है। यदि उनके साथ नाइंसाफी हुई तो मीडिया के सामने रेल प्रशासन की पोल खोलेंगी।

रेल प्रशासन के सामने रनिंग स्टॉफ की पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों ने कुछ इसी तरह भड़ास निकाली। गुरुवार को जोनल स्टेशन की लॉबी में रेलवे ने परिवार के साथ संरक्षा संवाद (सेफ्टी सेमिनार) रखा था। उनसे चर्चा और परेशानियों को सुनने डीआरएम बी गोपीनाथ मलिया व एडीआरएम एसके सोलंकी उपस्थित थे। शाम 4.30 बजे डीआरएम कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।

इस दौरान एक रनिंग स्टॉफ की श्रीमती सीता सिंह ने ड्यूटी रोस्टर को लेकर रेल प्रशासन पर निशाना साधा। उनका कहना था कि नियम 8-9 घंटे ड्यूटी कराने की है। लेकिन 14-15 घंटे ड्यूटी ली जाती है। इससे पति की नींद पूरी नहीं हो पाती है। मंडल का एक भी रनिंग रूम ऐसा नहीं है जहां शौचालय की व्यवस्था है। ऑन ड्यूटी उन्हें इसके लिए कुछ दूर जाना पड़ता है। इसकी वजह से भी उन्हें आराम नहीं मिल पाता है। प्रधानमंत्री मोदी स्वच्छता पर जोर दे रहे हैं। लेकिन रेलवे की कार्यशैली ठीक इसके विपरीत है।

श्रीमती संगीता भदौरिया ने मंच में कोरबा रनिंग रूम की असुविधा को उजागर किया। घर से उन्हें अच्छा भोजन कराकर भेजा जाता है लेकिन ड्यूटी खत्म करने के बाद जब वे रनिंग रूम पहुंचते हैं तो उन्हें पेटभर भोजन नहीं मिलता है। जानबूझकर घटिया क्वालिटी का भोजन परोसा जाता है। सड़ी- गली सब्जी खाने से हर पल बीमार होने का खतरा रहता है। अगर कोई चालक या सहायक रनिंग रूम की इस अव्यवस्था को उजागर कर दे तो उन्हें सजा दी जाती है। पिछले दिनों एक ऐसा ही मामला सामने आया था।

आराम प्रभावित न हो इसलिए बच्चों को सिखाए कब हंसना है व रोना

संरक्षा संवाद में रनिंग स्टॉफ की पत्नियों ने कहा कि हम अपने पतियों का घर पर पूरा ख्याल रखते हैं। उनके खाने-पीने से आराम का खास ध्यान रखा जाता है। विश्राम के दौरान बाधा न आए। इसलिए बच्चों को यह सिखाया गया है कि कब हंसना है और कब रोना। बच्चों को आजादी तक छीननी पड़ी है। हम अपने बच्चों पर गर्व है कि वह इस पर सहयोग देते हैं।

अकेले मनाना पड़ता है जन्मदिन व सालगिरह

श्रीमती संगीता भदौरिया ने मंच के माध्यम से अपनी आपबीती सुनाई। उनकी बातों का तालियों से समर्थन किया गया। उनका कहना था कि हमारी भी इच्छा होती है कि पति के साथ घर पर जन्मदिन कार्यक्रम व सालगिरह की खुशी बाहर जाकर मनाएं। लेकिन इस सुनहरे अवसर से हमें अक्सर वंचित होना पड़ता है। इसकी वजह कड़ी ड्यूटी व छुट्टी न मिलना है।

एसी में किसे आती है नींद?

रनिंग स्टॉफ को जिस तरह आराम व सुविधा मिलनी चाहिए रेल प्रशासन उन्हें देने से परहेज करता है। बीच यह बात सामने आई कि इंजन में एसी लगने पर ऑन ड्यूटी चालक व सहायक की आंख लग जाएगी। इससे हादसे की आशंका रहती है। लेकिन परिवार के सदस्यों ने कहा कि इस मंच के माध्यम से हम पूछना चाहते हैं कि यह परेशानी चालकों की है या उनकी खुद की। चेंबर में एसी में बैठने से नींद अफसरों को आती होगी, चालक को नहीं है। उनके हाथों में सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी होती है। यही वजह है कि संरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता में शामिल है।

जब बेटी ने कहा सुविधा जरूरी है

चालक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव की बेटी श्रेया भी इस कार्यक्रम में मौजूद थी। उसने मंच में जाकर कुछ बोलने की इच्छा जाहिर की। उसने केवल इतना ही कहा कि पापा बहुत हैवी ड्यूटी करते हैं। उन्हें आराम नहीं मिल पाता है। इसलिए मेरी गुजारिश है कि बोर्ड के नियमानुसार ही ड्यूटी कराई जाए। एक बड़ी समस्या टॉयलेट की है। प्लीज डीआरएम सर इस परेशानी को दूर करें।

घर में संकट आ गया तो किससे मांगे मदद

रनिंग स्टॉफ की पत्नियों ने रेल प्रशासन के उस आदेश का विरोध किया जिसमें उन्हें ड्यूटी के दौरान मोबाइल को बंद करने के लिए कहा गया है। किसी ने बुजुर्ग सास-ससुर तो किसी ने बच्चों को अचानक आने वाली परेशानी का हवाला देते हुए कहा कि इस स्थिति में हम किस तरह उन्हें सूचना देंगे। किससे मदद मांगी जा सकती है। इस नियम पर तत्काल संशोधन किया जाए। इससे मोबाइल के जरिए कम से कम वह परिवार के संपर्क में तो रहेंगे।

ये बातें भी आई सामने

- आराम के लिए ट्रेन में एक सीट होनी चाहिए

- आपातकालीन ब्रेक का अभ्यास प्रतिदिन हो, इससे चालक व सहायक की झिझक दूर होगी। अभी इस परिस्थिति में घबराते हैं।

- तीसरी बार नाइट ड्यूटी न लगाई जाए

- 16 घंटे रेस्ट का प्रावधान

- पीआर समय पर बताना चाहिए

- आउट स्टेशन में रेस्ट का समय बढ़ाया जाए



मीडिया के बजाय परेशानी लेकर मेरे पास आएं : डीआरएम



संरक्षा संवाद के अंतिम चरण में डीआरएम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे खुशी होगी कि यदि किसी को परेशानी तो सीधे मुझे बताएं न की मीडिया के पास जाएं। रेलवे एक परिवार है और आप सभी उसके सदस्य। घर की परेशानी घर में दूर होनी चाहिए। उनकी समस्याएं दूर होंगी। लेकिन इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। रनिंग रूम में भोजन को लेकर दिक्कत है। इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। इसके तहत पहले चालक व सहायक राशन सामान की जांच करेंगे। उनकी सहमति होने के बाद ही भोजन बनाया जाएगा




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