Jul 22, 2017

VERY VERY BAD - सीएजी (CAG) के आडिट रिपोर्ट ने रेलवे की पोल खोल दी - रेलवे में परोशे जा रहे खाने इंसानी इस्तेमाल के मापडंडों से बहुत नीचे CAG Report Says that the Food Supplied in the Indian Railways is Worst


Image result for Food  Indian Railways is Worst
भारतीय रेलवे की कैटरिंग सर्विस पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में रखी जानी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे स्टेशनों पर जो खाने-पीने की चीजें परोसी जा रही हैं, वो इंसानी इस्तेमाल के लायक ही नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं। डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजों को उनके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए तयशुदा टाइम पीरियड के गुजर जाने के बावजूद बेचा जा रहा है। इसके अलावा, अनाधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। 

सूरेश प्रभु भले रेलवे में नये मुकाम हासिल करने के दावे कर रहे हों लेकिन रेलवे का सूरत-ए-हाल कुछ और है। सीएजी (CAG) के आडिट रिपोर्ट ने  रेलवे की पोल खोल दी है। सीएजी ने कहा कि रेलवे में परोशे जा रहे खाने इंसानी इस्तेमाल के मापडंडों से बहुत नीचे हैं।
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों और स्टेशनों पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं। डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजों को  एक्सपायर होने के बावजूद भी बेचा जा रहा है।
इसके अलावा, अनाधिकृत ब्रैंड की पानी की बोतलें बेची जा रही हैं। जांच में पाया गया कि रेल परिसरों में साफ सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा, ट्रेन में बिक रहीं चीजों का बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं।

सीएजी और रेलवे की जॉइंट टीम ने 74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों का दौरा कर जायजा लिया जहां उन्हें रेलवे की खामियां नजर आई।ऑडिट रिपोर्ट में लिखा है, ‘पेय पदार्थों को तैयार करने के लिए नल से सीधे अशुद्ध पानी लेकर इस्तेमाल किया जा रहा था।
कूड़ेदान ढके नहीं हुए थे और उनकी नियमित अंतराल पर सफाई नहीं हो रही थी। खाने की चीजों को मक्खी, कीड़ों और धूल से बचाने के लिए उन्हें ढककर नहीं रखा जा रहा था।
इसके अलावा, ट्रेनों में चूहे, कॉकरोच  का आना जाना आम बात है। जो खाने को प्रदूषित करते हैं।
किसी के पास नहीं था मेन्यू कार्ड
सीएजी (CAG) और रेलवे की टीम के जायजा लेने के दौरान किसी भी वेटर, कैटरिंग मैनेजरों के पास कोई मेन्यू कार्ड नहीं था और नाहीं उनसे जुड़ा को रेट कार्ड था।
नहीं है ब्लू प्रिंट 
रिपोर्ट के मुताबिक,भारतीय रेल प्रशासन जरूरी बेस किचन, ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीनें जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावशाली कदम उठाने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में लिखा है, ‘सात रेलवे जोन्स में कैटरिंग सर्विस के लिए प्रावधानों का ब्लूप्रिंट ही नहीं तैयार किया गया।
इसके अलावा,यह भी लिखा है कि पॉलिसी में बार-बार बदलाव करने से यात्रियों को कैटरिंग सर्विस मुहैया कराने वाले मैनेजमेंट पर बेतरतीब रहने का संकट छाया रहता है।

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