Aug 13, 2017

कंडक्टर श्री विजय शंकर सिंह ने अपनी सूझ भुज से बड़ी कुशलता से हजारों यात्रियों की जान बचाई

रात के 1.00 बजे थे,12317 अकालतख्त एक्सप्रेस हवा से बाते करते हुए सुल्तानपुर से निकल लखनऊ की तरफ दौड़ रही थी।कंडक्टर श्री विजय शंकर सिंह अपने पांच कोच चेक कर के अपनी सीट जो A1 में थी पर आकर चार्ट बना रहे थे,तभी B3 के अटेंडेंट ने उनको बताया कि B3 में एक


सरदारजी डरे हुए खड़े दिखे और COR को बुला रहे है,विजय जी अपना काम छोड़ B3 की तरफ दौड़े...जाकर देखा तो टॉयलेट में एक डिब्बा जैसी संदिग्ध वस्तु पड़ी है,बिना कोई विलंब किये श्री विजय जी ने लखनऊ कंट्रोल को फ़ोन करके सूचना दी और गाड़ी रुकवाने के लिए कहा,गार्ड के पास भी सूचना भेजी गई।

अकबरगंज स्टेशन पर ट्रेन रात के 1.20 के करीब रुका दी गयी।नजदीक के पुलिस थाने से पुलिस आयी और जायजा लिया।इंनसेक्टर जी ने श्री विजय जी से कहा कि बोगी को खाली कराइये जिसको विजय जी ने इनकार कर दिया,रात के अंधेरे में 7फूट नीचे प्लेटफ़ॉर्म पर सभी यात्री नही उत्तर सकते थे।मगर फीर तत्परता से COR श्री विजय जी ने B3 के सभी यात्रियों को धीरे धीरे B2 में एडजस्ट किया और B4 के यात्रियों को B5 में ले गए।तब तक पुलिस ने बम विरोधी दस्ते को बुलाने का काम किया जो वहां से 70 कम दूर लखनऊ से आना था।सभी यात्री जग गए थे मगर COR श्री विजय जी के सूझ बूझ से कोई हड़कंप नही मचा, सब शांत थे,जिन्हें नीचे उतरने में परेशानी नही थी वो नीचे खड़े हो गए।सुबह 6 बजे के करीब बम विरोधी दस्ता लखनऊ से पोहचा साथ मे रेल के ऑफ़सर और प्रेस भी।

बम को निष्क्रिय किया गया।

प्रेस और ऑफ़सर के सामने यात्री COR श्री विजय जी की जम के तारीफ कर रहे थे...

इस लेख का उद्देश्य आप सब को और रेल के ऑफ़सर को बताना है कि cor रात में भी किस तरह सतर्कता से कार्य करते है।

Cor श्री विजय शंकर सिंह ने अपनी सूझ भुज से बड़ी कुशलता से हजारों यात्रियों की जान बचाई है।







घटना 10/8/17 की है,

12317,कोलकत्ता -अमृतसर अकालतख्त एक्सप्रेस

COR श्री विजय शंकर सिंह

CTI बनारस ,उत्तर रेल,लखनऊ डिव