Jun 9, 2018

अपने बलबूते रेलवे नहीं शुरू करेगा नये प्रोजेक्ट्स, राज्यों को 50 फीसदी राशि मिलाना अनिवार्य


रेलवे ने सैद्धांतिक रूप से निर्णय लिया है कि अब वह अपने बलबूते पर नये रेल प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं करेगा. यदि कोई प्रोजेक्ट्स शुरू किया जाएगा तो उसकी कुल लागत का 50 फीसदी राशि उस राज्य को वहन करना होग, जहां से यह रेल प्रोजेक्ट गुजरेगा. यह बात आज 8 जून शुक्रवार को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने पलपल संवाददाता द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में कही. श्री लोहानी पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक दिनी निरीक्षण पर आये हुए हैं, वे पत्रकारवार्ता में अनेक सवालों के जवाब दे रहे थे.

रेलवे स्टेशन पर आयोजित पत्रवार्ता में श्री लोहानी ने कहा कि देश भर से लगातार नये रेल प्रोजेक्ट्स शुरू करने की मांग की जा रही है, लेकिन रेलवे के पास इतना फंड नहीं है कि वे सभी क्षेत्रों की डिमांड पूरी कर सके, जिसे देखते हुए यह निर्णय ले लिया गया है कि जो प्रोजेक्ट्स फिलहाल चल रहे हैं, उसे तो रेलवे अपने संसाधनों से पूरा करेगा, लेकिन अब भविष्य में जो भी नये प्रोजेक्ट्स, जिनमें नई रेल लाइन, डबलिंग व अन्य प्रोजेक्ट्स होंगे, वे तभी पूरे होंगे, जब संबंधित राज्य सरकारें उस प्रोजेक्ट की कुल लागत का 50 फीसदी राशि मुहैया करायेगी. इस निर्णय का प्रभाव जबलपुर-इंदौर नई रेल लाइन परियोजना पर पड़ा है, इस परियोजना की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर राज्य शासन के पास 50 फीसदी लागत उपलब्ध कराने के लिए भेजी गई है. यदि राज्य सरकार धनराशि मुहैया कराती है तो ही यह प्रोजेक्ट शुरू हो सकेगा.

संरक्षा सर्वोपरि, ट्रेक हो रहे मजबूत, तभी सुधरेगी ट्रेनों की टाइमिंग   देश भर में ट्रेनों की लेटलतीफी के सवाल पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने स्पष्ट कर दिया कि अभी कुछ माह तक और यात्रियों को रेलवे का सहयोग करना पड़ेगा. इस समय पूरे देश भर में संरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए महत्वपूर्ण उपााय किये जा रहे हैं, जिसमें ट्रेक का मजबूतीकरण, पुल-पुलिया, सिग्नलिंग प्रणाली आदि को मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि दुर्घटना की संभावना शून्य की जा सके, यह सब काम पूरा होने के बाद ही ट्रेनों की पंचुअलिटी दुरुस्त हो सकेगी. अभी तक रेलवे मेें लगातार नई ट्रेनें शुरू कर दी जाती थीं, ट्रेक व अन्य संसाधनों पर जबर्दस्त दबाव पड़ता था, जिसके चलते रेल दुर्घटनाएं भी सामने आती रही हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए रेलवे ने तय किया है कि पहले संरक्षा के उपाय होंगे, चाहे ट्रेन भले ही लेट हो, यह सब काम पूरा होने के बाद रेल चलाने की क्षमता भी बढ़ जायेगी और स्पीड भी, जिससे टाइमिंग भी दुरुस्त होगी और नई गाडिय़ां शुरू करने के लिए स्लॉट भी मिल जायेगा.

Source -  Pal Pal India 

Translate in your language

M 1

Followers