Jun 11, 2018

रेलवे में ट्रेकमैन, एएलपी, गार्ड के पदों पर महिलाओं की होगी नो एंट्री

  
रेल संचालन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े पदों जैसे ट्रेकमैन, सहायक लोको पायलट (एएलपी) व ट्रेन गार्ड के पदों पर महिलाओं की नो एंट्री हो सकती है. इन पदों की कार्य की कठिन परिस्थितियां व महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड इस पर विचार कर रहा है. इस संबंध में शीघ्र ही कोई नीतिगत निर्णय लिया जा सकता है, जिसमें महिलाओं की इन पदों पर भर्ती नहीं की जायेगी.

बताया जाता है कि रेलवे में पिछले कुछ वर्षों में सभी पदों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. रेलवे भी लगातार भर्तियां कर रहा है, जिसमें महिलाओं की संख्या भी काफी है. खासकर पहले महिलाओं के लिए जो पद अनफिट माने जाते रहे, जिसमें ट्रेन संचालन से जुड़े पद एएलपी, गार्ड व ट्रेक के मरम्मतीकरण के कार्य में लगने वाले ट्रेकमैन (गेंगमैन) इसमें भी महिलाओं की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है, लेकिन इन पदों पर नौकरी लगने के बाद महिलाओं को फील्ड में काम करने के लिए कई तरह की व्यवहारिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था.

ट्रेकमैन में काम के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में पोस्टिंग भी नहीं दी जाती, इसके अलावा रात्रिकालीन पेट्रोलिंग के कामों में भी तैनाती नहीं की जा सकती, वहीं एलएलपी की कार्य परिस्थितियां भी ऐसी है कि इस स्टाफ को मुख्यालय से दो-दो से तीन-तीन दिन बाहर रहना पड़ता है, जिसके चलते यदि किसी महिला एएलपी व गार्ड के छोटे बच्चे हैं, जिन्हें दुग्धपान कराना या उनके स्वास्थ्य की समस्या आती है तो ऐसी महिला एएलपी को भी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता रहा है. इसी तरह गार्ड की पोस्ट का मामला भी सामने आता रहा है. यदि किसी मालगाड़ी में महिला गार्ड तैनात है, किन्हीं कारणों से जंगल या सुनसान स्थान पर खड़ी होती है, तब गार्ड केबिन में अकेली महिला की सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है.

पमरे एम्पलाइज यूनियन ने सीआरबी के समक्ष उठाई महिला स्टाफ की समस्याएं

पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय जबलपुर में गत 8 जून शुक्रवार को आए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी के समक्ष पश्चिम मध्य रेलवे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव के नेतृत्व में यूूनियन का एक प्रतिनिधि मंडल, जिसमें यूनियन के जबलपुर मंडल सचिव नवीन लिटोरिया, मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला शामिल थे, ने रेल कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर चर्चा की, जिसमें महिला कर्मचारियों, विशेषकर ट्रेकमैन, एएलपी व गार्ड के पद पर काम कर रही महिलाओं की ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं पर चर्चा की, इस दौरान सीआरबी श्री लोहानी ने भी माना कि कुछ पदों पर काम के दौरान महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, रेलवे बोर्ड इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है कि ऐसे पदों पर महिलाओं की भविष्य में नियुक्ति नहीं की जाए.

देश भर में यही समस्याएं

बताया जाता है कि रेलवे बोर्ड को देश भर के सभी रेल जोनों, मंडलों से यही रिपोर्ट मिल रही है कि ट्रेकमैन, एएलपी व गार्ड के पदों पर कार्यरत महिलाओं की फील्ड ड्यूटी कराने में काफी परेशानियां हो रही हैं, साथ ही उनकी सुरक्षा को लेकर भी हर समय चिंता बनी रहती है, इसलिए कुछ पदों पर महिलाओं की भर्ती नहीं की जाए.
हर महिला को आफिस में नियुक्त नहीं किया जा सकता

ट्रेकमैन, एएलपी व गार्ड के पद पर भर्ती होने के बाद महिला स्टाफ चाहता है कि उसकी नियुक्ति फील्ड की बजाय आफिस में लगा दी जाए, इसके लिए वे अफसरों से अनुरोध करती हैं, जबकि व्यवहारिक में सभी महिला स्टाफ से आफिस में नौकरी कराना संभव नहीं होता, जिससे कई बार विवाद की स्थिति भी निर्मित होती रही है, वहीं पुरुष कर्मचारी महिलाओं के साथ नरम बर्ताव करने का आरोप भी अफसरों पर लगाता रहता है.
इनका कहना....

हमने कुछ संवेदनशील पदों जैसे ट्रेकमैन, एएलपी व गार्ड के पदों पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को फील्ड में तैनाती के दौरान आने वाली समस्याओं की ओर चेयरमैन रेलवे बोर्ड श्री लोहानी का ध्यान आकर्षित कराया है. साथ ही यूनियन ने मांग की है कि जो महिलाएं इन पदों पर कार्य कर रही हैं, उनका कैडर चेंज कर दूसरे विभाग में समायोजित किया जाए, साथ ही भविष्य में ऐसे संवेदनशील पदों पर भर्ती किये जाने पर कोई नीति बनाई जाए. यूनियन की मांग पर रेलवे बोर्ड चेयरमैन श्री लोहानी ने भी माना है कि इस तरह की समस्याएं उनके ध्यान मेें हैं और रेलवे बोर्ड शीघ्र ही इन पदों पर भर्ती के संबंध में नीतिगत निर्णय लेगा.

Source - Pal Pal India

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