Jul 2, 2018

रेल प्रशासन द्वारा सार्वजनिक समस्या की जानबूझकर की जा रही अनदेखी



कल्याण के वालधुनी साइड के अंडर पास से रेलवे अस्पताल, इलेक्ट्रिक लोको शेड और स्कूल के लिए जाने का एकमात्र रास्ता है,जिसके निचे साल के बारहों महीने पानी भरा रहता है. पैदल तो छोडो, इसके नीचे से दुपहिया और तिपहिया वाहन से भी लोगों का निकल पाना काफी मुश्किल और परेशानी भरा होता है. यहां से बीमार मरीजों को लेकर एम्बुलेंस भी आती-जाती हैं, मगर इस रास्ते का सही रख-रखाव मुंबई मंडल का इंजीनियरिंग विभाग नहीं कर रहा है. इससे यहां आए दिन कोई न कोई बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है.

स्टेशन स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य एवं स्थानीय शिवसेना नेता सुशील कुमार शर्मा का कहना है कि रेल प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है. उन्होंने बताया कि वालधुनी से रेलवे अस्पताल, रेलवे इंस्टिट्यूट, चर्च, छोटे बच्चों का रेलवे स्कूल, लोको शेड इत्यादि के लिए जाने का एकमात्र रास्ता उक्त पुलिया के नीचे होकर गुजरता है. इस पुलिया के नीचे से एक नाला गुजरता है, जिससे इसके नीचे बने बड़े-बड़े गड्ढ़ों में हमेशा गंदा पानी भरा रहता है, जो कभी भी यहां से निकलने वाले लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकता है. उन्होंने कहा कि कोई भी वाहन चालक मरीजों को रेलवे अस्पताल ले जाने के लिए राजी नहीं होता हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है.

उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस रास्ते से रेलवे के बड़े अधिकारी एवं स्वयंभू रेल नेता भी रोज गुजरते हैं. लेकिन उनको यह सब दिखाई नहीं पड़ता है. उन्होंने बताया कि उन्हें रेलवे के ही एक अधिकारी ने बताया है कि कुछ दिन पहले यह रास्ता ठीक करवाया गया था, लेकिन एक ठेकेदार, जिसको उक्त पुलिया के गर्डर बदलने का ठेका दिया गया था, ने गर्डर निकालने के लिए क्रेन मंगाई थी, जो पुलिया से ऊंची थी. ठेकेदार ने क्रेन निकालने के लिए पुलिया की सतह को खोदकर नीचा किया था, लेकिन काम होने पर उसने गड्ढ़ों को नहीं भरा.

उनका कहना था कि इस रास्ते से एंबुलेंस मरीजों को लेकर आती जाती है. गड्ढ़ों के कारण कभी भी मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है, जिसकी जवाबदारी रेल प्रशासन की होगी. ज्ञातव्य है कि यह मामला विगत कई दिनों से स्थानीय मीडिया की सुर्खियों में रहा है, तथापि मंडल प्रशासन ने अब तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है. कई बार इस मामले को लेकर कई लोगों ने रेलवे बोर्ड, सीआरबी, महाप्रबंधक एवं मंडल रेल प्रबंधक सहित संबंधित अधिकारी को टैग करते हुए कई ट्वीट भी किए हैं, तथापि संबंधित अधिकारियों के कान में अब तक जूं तक नहीं रेंगी है.

Source - Rail Samachar

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