Jul 2, 2018

सीबीआई की जांच सभी जोनल क्रेडिट सोसाइटीज तक विस्तारित करने की मांग



दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन (एसआरएमयू) के महामंत्री एन. कन्हैया और सहायक महामंत्री एस. वीराशेखरन के खिलाफ रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) द्वारा 13 जून 2018 को अत्यंत गंभीर किस्म की शिकायतों की जांच करने के लिए समस्त कागजात के साथ डायरेक्टर, सीबीआई को एक पत्र लिखा गया है. यह शिकायत रेलवे बोर्ड को पीएमओ द्वारा 23 मई 2018 को फॉरवर्ड की गई थी. रेलवे बोर्ड के पत्र में कहा गया है कि उक्त दोनों यूनियन पदाधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के साथ ही सदर्न रेलवे एम्प्लाइज कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी, त्रिची में भारी भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और एमएससीएस ऐक्ट, 2002 के बाय लॉज, स्पेशल बाय लॉज एवं नियमों का उल्लंघन किया गया है. 

पत्र में रेलवे बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि उपरोक्त विषय की शिकायत अत्यंत गंभीर किस्म की है. अतः शिकायत को पूरी गंभीरता से लेते हुए सीबीआई द्वारा अपने स्तर पर गहराई से इसकी जांच के लिए शीघ्रता से आवश्यक कदम उठाए जाएं. इसके साथ ही रेलवे बोर्ड ने उक्त दोनों यूनियन पदाधिकारियों के विरुद्ध कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में कृषि एवं कोऑपरेशन विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी एवं सीवीओ पी. के. बोरठाकुर को उपरोक्त शिकायत के दूसरे भाग को फॉरवर्ड करते हुए उनसे सदर्न रेलवे एम्प्लाइज कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी/बैंक में फंड की बड़े पैमाने पर अफरातफरी और नियमों के उल्लंघन से संबंधित जांच का अनुरोध किया है. 

रेलवे बोर्ड की तरफ से यह दोनों पत्र डिप्टी डायरेक्टर/विजिलेंस (एएंडपी) आर. डी. राम द्वारा लिखे गए हैं. इन दोनों पत्रों की एक-एक प्रति पीएमओ में डिप्टी सेक्रेटरी अजीत कुमार और मुख्य शिकायतकर्ता लारपुथा राज, तिरुनगर, पोन्नामलाईपट्टी, त्रिची को भी भेजी गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार लारपुथा राज सदर्न रेलवे एम्प्लाइज कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी में निदेशक पद पर रहे हैं. उन्होंने पीएमओ को अपनी शिकायत 9 मई 2018 को भेजी थी. बताया जाता है कि श्री राज की यह शिकायत करीब 100-125 पेज की है. यानि श्री राज ने अपनी शिकायत के साथ समस्त पुख्ता प्रमाण भी पीएमओ को भेजे थे. इसके अलावा उन्होंने अपनी शिकायत की एक प्रति समस्त कागजात के साथ रेलमंत्री पीयूष गोयल को भी उसी दिन भेजी थी. परंतु श्री गोयल ने तत्काल इस पर कोई कदम उठाना जरूरी नहीं समझा. जबकि प्रधानमंत्री ने उनकी शिकायत की गंभीरता को बखूबी समझा और तत्काल कार्रवाई के लिए रेलवे बोर्ड को लिखा, जिस पर रेलवे बोर्ड ने भी अत्यंत फुर्ती दिखाई और अब यह मामला सीबीआई और जॉइंट सेक्रेटरी/सीवीओ, कोआपरेटिव सोसाइटीज की जांच के दायरे में आ गया है. 

शिकायत में ‘माफिया यूनियन’ के महामंत्री एन. कन्हैया, जो कि कभी रेलवे में एक पार्सल पोर्टर हुआ करता था, की कुल संपत्ति 1500 करोड़ रुपये तथा सहायक महामंत्री एस. वीराशेखरन, सीटीटीआई, त्रिची मंडल, की कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है. शिकायत में कहा गया है कि वीराशेखरन एसआरएमयू गोल्डन रॉक शॉप्स का इंचार्ज रहा है और ईएफ बुक्स मामले में उसकी संलिप्तता पहले से ही रही है, जिसमें करीब 80 लाख रुपये के घोटाले का मामला प्रमाणित है. हालांकि शिकायत में इन दोनों महाभ्रष्ट यूनियन पदाधिकारियों की कुल संपत्ति भले ही क्रमशः 1500 करोड़ और 100 करोड़ बताई गई है, मगर कई जानकार इससे असहमत होते हुए कहते हैं कि यह क्रमशः 5000 करोड़ और 1000 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है. सच्चाई क्या है, यह तो अब सीबीआई और केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोआपरेटिव सोसाइटीज की जांच के बाद ही सामने आ पाएगा. 

जानकारों का कहना है कि मनमानी और भ्रष्टाचार को लेकर दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन का महामंत्री एन. कन्हैया लंबे समय से गंभीर विवादों में रहा है. उनका यह भी कहना है कि यह सर्वविदित है कि उसे अब तक दक्षिण रेलवे और रेलवे बोर्ड के कई उच्च अधिकारी बचाते रहे हैं और उससे इसके बदले में अपने हिस्से की मलाई चाटते रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में फेडरेशन के कुछ उच्च पदाधिकारी भी किसी से पीछे नहीं रहे हैं. कुछ रेल अधिकारियों और फेडरेशन के पदाधिकारियों के संरक्षण और वरदहस्त के चलते ही यह एक मामूली पार्सल पोर्टर आज हजारों करोड़ की अवैध संपत्ति का मालिक बन बैठा है. उनका यह भी कहना था कि इससे पहले जब ‘रेलवे समाचार’ ने यह लिखा था कि पूर्व सीसीएम/द.रे. को ट्रांसफर कराने के लिए 10 करोड़ रूपये रेलवे बोर्ड में खर्च किए गए हैं, तब किसी को भी इस तथ्य पर विश्वास नहीं हुआ था, परंतु अब सच्चाई सबके सामने है. 

जानकारों का कहना है कि अब ऐसे लोगों को इस मामले में सीबीआई जांच के दौरान होने वाले अन्य कई बहुत बड़े-बड़े आश्चर्यों के लिए भी तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इस पार्सल पोर्टर का इंवोल्वमेंट माइनिंग घोटाले सहित कई अन्य मामलों में कई स्थानीय नेताओं एवं नौकरशाहों के करोड़ों खपाने के लिए उनके फ्रंटमैन के रूप में भी बताया गया है. इसके अलावा नोटबंदी के दौरान उपरोक्त सोसाइटी से उनके अरबों रुपये के पुराने नोट भी बदले जाने की खबर है. जानकारों के अनुसार करीब 20 साल पहले भी इस पार्सल पोर्टर के घर एवं दफ्तर में सीबीआई ने छापा डाला था, जिसमें बताते हैं कि बोरों में भरे हुए अरबों रुपये के नोट बरामद हुए थे. तब तीन दिन की मोहलत ‘मैनेज’ करके और रेलकर्मियों के नाम रातोंरात फर्जी रसीदें काटकर उन नोटों को रेलकर्मियों से प्राप्त चंदा बताकर पूरे मामले को रफादफा कर दिया गया था. परंतु जानकारों का कहना है कि अब केंद्रीय स्तर पर सीबीआई में मामला दर्ज हो जाने से ऊंट पहाड़ के नीचे आ गया है, जहां इस पूरे मामले को ‘मैनेज’ कर पाना पार्सल पोर्टर के लिए शायद अब संभव नहीं हो पाएगा.

Source - Rail Samachar 

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