Jun 10, 2019

रुड़की देवबंद के बीच फिर चली उम्मीद की रेल


केंद्र में दोबारा भाजपा सरकार के काबिज होने के बाद अब रुड़की देवबंद रेलवे लाइन बिछाने के काम में तेजी आ गई है। यह मामला अटका पड़ा था। कुल मिलाकर रुड़की देवबंद के बीच ‘उम्मीदों की रेल’ फिर चलनी शुरू हो गई है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों की माने तो 28 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए यूपी के हिस्से में प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो जाएगी। उत्तराखंड में भी अधिग्रहण के मसले पर काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
दरअसल, यहां मुआवजे के विवाद में आठ गांवों में अधिग्रहण का काम अटका है। उत्तराखंड में प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दोनों प्रदेशों के अधिकारी एक-दूसरे के संपर्क में हैं। अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन स्तर पर कवायद चल रही है। लाइन का 11 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड, जबकि 17 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में पड़ेगा। रुड़की देवबंद के बीच रेल लाइन से रुड़की से नई दिल्ली के बीच दूरी 32 किलोमीटर कम हो जाने का दावा किया जा रहा है।


दो साल पहले संयुक्त टीम ने किया था सर्वे
रेलवे लाइन बिछाने के लिए दो साल पहले रेलवे, भूमि अध्यापित, चकबंदी, ऊर्जा निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग की संयुक्त टीम ने यूपी के जटोल, मझोंल जबरदस्तपुर, नियामतपुर, भन्हेड़ा खास, माजरी, साल्हापुर, राजपुर उर्फ रामपुर, दीवाल हेड़ी, दुनीचंदपुर, असदपुर करजाली, देवबंद, देवबंद हदूद, चकरम बाड़ी, नूरपुर व उत्तराखड़ के रहीमपुर, पनियाला चंदापुर, भिस्तीपुर, साल्हापुर , पनियाला, चूड़ापुर, लाठरदेवा शेख, पनियाली, झबरेड़ी, झबरेड़ा और शीतलपुर गांव में सर्वे किया था परियोजना के सहायक अभियंता परियोजना के सहायक अभियंता विनोद तलवार ने बताया कि सहारनपुर डीएम ने एसडीएम देवबंद को सोमवार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कराए जाने के आदेश दिए हैं। 

उत्तराखंड के इन गांवों से होकर गुजरेगी रेलवे लाइन 
यूपी के देवबंद से उत्तराखंड के रुड़की तक 28 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के बीच रुड़की और इसके आसपास सटे साल्हापुर, भिस्तीपुर, रहीमपुर, पनियाला, चंदापुर, लाठादेवा शेख, पानियाली, पनियाला, झबरेड़ी, झबरेड़ा और शीतलपुर आदि गांवों की जमीन आ रही है। इसी का अधिग्रहण किया जाना है। करीब आठ सौ करोड़ रुपये की इस परियोजना में 51 हेक्टेयर भूमि का हिस्सा शामिल किया गया है। बताया गया है कि यूपी क्षेत्र में 71 पुलिया और चार बड़े पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया है। 

सितंबर, 2018 तक पूरा होना था काम
रेलवे लाइन बिछाने का काम सितंबर, 2018 तक पूरा होना था। लेकिन यूपी और उत्तराखंड में भूमि अधिग्रहण चक्कर में अभी तक काम नहीं हो पाया। इसे लेकर किसान लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ किसानों को प्रशासन ने मुआवजा राशि दे दी थी। जबकि अन्य किसानों ने अपनी भूमि देने से इनकार कर दिया था। परियोजना की शुरुआत 2007 में ही हो चुकी थी। किसानों के मुआवजा विवाद के बाद राज्य सरकार ने 2012 में रेलवे बोर्ड से मुआवजे के बढ़े दाम दिए जाने की मांग की थी। लेकिन तब रेलवे बोर्ड ने जमीन के बढ़े दाम चुकाने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला अधर में लटक गया। जब राज्य में भाजपा की सरकार आई तो तब सीएम त्रिवेंद्र रावत ने रेल मंत्री से भेंट कर जमीन अधिग्रहण का आधा हिस्सा देने की गुजारिश की। 20 अप्रैल, 2018 को रेलवे बोर्ड के एग्जीक्यूटिव निदेशक एससी जैन ने पत्र जारी कर कहा था कि अब जमीन अधिग्रहण का आधा हिस्सा रेलवे देगा। यह स्वीकृति कुल 125 करोड़ की थी।

Source - Amar Ujala 


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