8वें वेतन आयोग को जेसीएम का बड़ा ज्ञापन: न्यूनतम वेतन ₹69,000, 6% वार्षिक वृद्धि और Pay Matrix में बड़े बदलाव का प्रस्ताव
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी भारत सरकार की रीढ़ हैं और देश भर में नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से ग्रुप ‘C’ और ‘B’ श्रेणी के कर्मचारी, जो रेलवे एवं रक्षा मंत्रालय में औद्योगिक कर्मचारियों के रूप में कार्यरत हैं, इस व्यवस्था का प्रमुख आधार हैं। जेसीएम ने जोर देकर कहा कि वेतन केवल आर्थिक तत्व नहीं है, बल्कि यह गरिमा, प्रेरणा और दक्षता का आधार है, इसलिए 8वां वेतन आयोग यह सुनिश्चित करे कि वास्तविक वेतन सुरक्षित रहे और उसमें उचित वृद्धि हो, न कि केवल समायोजन।
ज्ञापन में न्यूनतम वेतन को वैज्ञानिक जीवन-यापन (Living Wage) के आधार पर निर्धारित करने की मांग की गई है, जिसमें भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और डिजिटल आवश्यकताओं को शामिल किया जाए। इसके साथ ही परिवार की परिभाषा में बड़ा बदलाव सुझाते हुए वर्तमान 3 इकाई प्रणाली को समाप्त कर 5 इकाई प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और माता-पिता (प्रत्येक 0.8 इकाई) शामिल होंगे। यह प्रस्ताव Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act तथा Social Security Code 2020 के अनुरूप बताया गया है।
जेसीएम ने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी सेवा केवल अनुबंध नहीं बल्कि एक विशेष दर्जा है, जिसमें न्याय और गरिमा की अपेक्षा होती है। सर्वोच्च न्यायालय के Bhupendra Nath Hazarika मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए और कर्मचारियों की वैध अपेक्षाओं को पूरा करना चाहिए। वर्तमान न्यूनतम वेतन को अपर्याप्त बताते हुए इसे सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करने के अनुरूप बढ़ाने की मांग की गई है।
पोषण मानकों के संदर्भ में जेसीएम ने कहा कि पूर्व का 2700 कैलोरी मानक अब पर्याप्त नहीं है और ICMR द्वारा सुझाए गए लगभग 3490 कैलोरी मानक को अपनाया जाना चाहिए, विशेषकर श्रमसाध्य कार्यों के लिए। भोजन में प्रोटीन, डेयरी, फल-सब्जियां, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य शामिल करने पर जोर दिया गया है, ताकि केवल जीवित रहने के बजाय स्वास्थ्य, उत्पादकता और गरिमा सुनिश्चित हो सके।
ज्ञापन में वेतन को शासन और विकास का चालक बताते हुए कहा गया है कि उचित वेतन से उत्पादकता, मनोबल और प्रतिभा प्रतिधारण में वृद्धि होती है। वेतन संशोधन को व्यय नहीं बल्कि निवेश माना जाना चाहिए। विभिन्न व्ययों जैसे खाद्य, वस्त्र, आवास (7.5%), ईंधन व अन्य सेवाएँ (20%), कौशल विकास (25%), सामाजिक/अतिरिक्त व्यय (25%) और तकनीकी व्यय (5%) को ध्यान में रखते हुए जेसीएम ने न्यूनतम वेतन ₹69,000 निर्धारित किया है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर 3.833 प्रस्तावित किया गया है, जिसका विवरण ज्ञापन के Annexure-I में दिया गया है।
वार्षिक वेतन वृद्धि को वर्तमान 3% से बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अतिरिक्त Pay Matrix में व्यापक बदलाव सुझाते हुए विभिन्न स्तरों के विलय का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें स्तर 2 और 3 को स्तर 3 में, स्तर 4 और 5 को स्तर 5 में, स्तर 7 और 8 को स्तर 8 में तथा स्तर 9 और 10 को स्तर 10 में मिलाने की बात कही गई है। साथ ही स्तर 5 के कर्मचारियों को एक बार के उपाय के रूप में स्तर 6 में अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है।
👉 प्रमुख प्रस्ताव (Pay Structure):
- न्यूनतम वेतन: ₹69,000
- फिटमेंट फैक्टर: 3.833
- वार्षिक वृद्धि: 6%
- वेतन अनुपात (Min:Max): 1:12 से अधिक नहीं
प्रस्तावित Pay Matrix के अनुसार विभिन्न वेतन स्तरों के न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि का सुझाव दिया गया है, जैसे Level 1 के लिए ₹69,000, Level 2-3 के लिए ₹83,200, Level 4-5 के लिए ₹1,12,000, Level 6 के लिए ₹1,35,700, Level 7-8 के लिए ₹1,82,500 और Level 9-10 के लिए ₹2,15,100। Level 11 से 17 तक के स्तरों को पुनः क्रमांकित कर नए Pay Scales के रूप में बनाए रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
सरकारी व्यय के संदर्भ में ज्ञापन में बताया गया है कि वर्तमान में केंद्र सरकार अपने कुल राजस्व व्यय का लगभग 13% वेतन, भत्तों और पेंशन पर खर्च करती है, जो 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद बढ़ सकता है। हालांकि, इसे बोझ नहीं बल्कि निवेश बताया गया है, क्योंकि वेतन वृद्धि से क्रय शक्ति बढ़ती है, जिससे मांग और कर संग्रह में वृद्धि होती है, और अंततः आर्थिक विकास को बल मिलता है।
जेसीएम ने सुदृढ़ वेतन संरचना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे प्रतिभाशाली व्यक्तियों को आकर्षित करने, अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखने और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए हर 5 वर्ष में वेतन संशोधन की आवश्यकता बताई गई है।
ज्ञापन में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि वे राजस्व संग्रह, राष्ट्रीय सुरक्षा, परिवहन, नवाचार और नीतियों के क्रियान्वयन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकारी कार्यों का मूल्यांकन लाभ-हानि के आधार पर नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य का दायित्व सामाजिक सेवाएँ प्रदान करना है। भारत में केवल लगभग 1.6% जनसंख्या ही सरकारी सेवा में कार्यरत है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम है।
भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि देश वर्तमान में $4.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है। GDP और कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि को सरकार की बढ़ती वित्तीय क्षमता का प्रमाण बताया गया है, जिससे वेतन संशोधन को सहजता से लागू किया जा सकता है।
👉 अन्य प्रमुख सिफारिशें:
- 01.01.2026 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को लाभ
- स्वायत्त संस्थाओं एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करना
- ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) के वेतन में संशोधन
- BSNL एवं DoT पेंशनभोगियों को शामिल करना
अंत में जेसीएम ने कहा कि वेतन निर्धारण केवल राजस्व व्यय के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि कर्मचारियों की भूमिका, प्रतिभा आकर्षण और आर्थिक लाभों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। एक पारदर्शी, न्यायसंगत और गतिशील वेतन संरचना, स्थायी वेतन समीक्षा तंत्र के साथ, प्रभावी सार्वजनिक सेवा सुनिश्चित करेगी।
इसके साथ ही एक अतिरिक्त प्रस्ताव के रूप में जेसीएम ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स से छूट देने की मांग भी की है, यह तर्क देते हुए कि कर्मचारी पहले से आयकर और जीएसटी जैसे करों का भुगतान कर रहे हैं।
ADMIN

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