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Jul 16, 2026

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध डीजल लोकोमोटिव एवं उनके नाम: इतिहास, महत्व और विशेषताएँ

भारतीय रेलवे में डीजल लोकोमोटिव का युग 1950 के दशक के उत्तरार्ध में प्रारम्भ हुआ। स्टीम इंजनों की तुलना में डीजल इंजन अधिक शक्तिशाली, किफायती और रखरखाव की दृष्टि से सरल थे। धीरे-धीरे इन्होंने अधिकांश रेल मार्गों पर स्टीम इंजनों का स्थान ले लिया और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डीजल युग के प्रारम्भिक वर्षों में कुछ महत्वपूर्ण लोकोमोटिवों को विशेष नाम भी दिए गए। इनमें से अनेक नाम भारत के महान नेताओं, राष्ट्रीय प्रतीकों, वीरता, शक्ति तथा तकनीकी उपलब्धियों से प्रेरित थे। कुछ नाम किसी नए लोकोमोटिव वर्ग के प्रथम इंजन को दिए गए, जबकि कुछ समय के साथ पूरे वर्ग की पहचान बन गए।

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध स्टीम लोकोमोटिव एवं उनके नाम: इतिहास, महत्व और रोचक तथ्य

 स्टीम लोकोमोटिव भारतीय रेलवे के स्वर्णिम युग की पहचान माने जाते हैं। लगभग एक शताब्दी तक भाप के इंजन भारतीय रेल परिवहन की रीढ़ रहे। इसी दौर में अनेक इंजनों को विशेष नाम दिए गए, जो केवल पहचान का माध्यम नहीं थे, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, तकनीकी उपलब्धियों और रेलवे की गौरवशाली परंपरा के प्रतीक भी बने।

इनमें कुछ नाम ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर आधारित थे, कुछ राष्ट्रीय भावनाओं से प्रेरित थे और कुछ ऐसे भी थे जो किसी विशेष उपलब्धि या रेलवे की तकनीकी प्रगति का प्रतिनिधित्व करते थे। आज भी रेलवे इतिहास के अध्ययन में इन नामित इंजनों का विशेष महत्व है।

Fairy Queen: भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे पुराने चालू स्टीम इंजनों में से एक

भारतीय रेलवे का इतिहास अनेक गौरवशाली उपलब्धियों से भरा हुआ है, लेकिन यदि किसी एक स्टीम लोकोमोटिव ने विश्व स्तर पर भारतीय रेल को विशेष पहचान दिलाई है, तो वह है Fairy Queen। यह केवल एक रेल इंजन नहीं, बल्कि भारत की औद्योगिक विरासत, इंजीनियरिंग कौशल और रेलवे इतिहास का जीवंत प्रतीक है।

लगभग डेढ़ शताब्दी से अधिक पुराना यह स्टीम इंजन आज भी रेलवे प्रेमियों, इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी ऐतिहासिक महत्ता और संरक्षित अवस्था के कारण Fairy Queen को विश्व के सबसे पुराने परिचालन योग्य (Operational) स्टीम लोकोमोटिवों में गिना जाता है।

Fairy Queen का परिचय

Fairy Queen का निर्माण वर्ष 1855 में इंग्लैंड की प्रसिद्ध कंपनी Kitson, Thompson & Hewitson द्वारा किया गया था। उस समय भारत में रेलवे का विस्तार प्रारम्भिक अवस्था में था और नई-नई रेल लाइनों पर स्टीम इंजन चलाए जा रहे थे।

यह इंजन ईस्ट इंडियन रेलवे (East Indian Railway) के लिए बनाया गया था और प्रारम्भिक वर्षों में यात्री तथा हल्की मालगाड़ियों के संचालन में उपयोग किया गया।

भारत के पहले नामित रेल इंजन: Thomason, Falkland, Sahib, Sultan और Sindh का इतिहास

भारत में रेलवे की शुरुआत केवल रेल पटरियों के निर्माण से नहीं हुई, बल्कि उन ऐतिहासिक लोकोमोटिव (रेल इंजनों) से भी हुई जिन्होंने देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था की नींव रखी। इन प्रारम्भिक इंजनों को केवल संख्या से नहीं, बल्कि विशिष्ट नामों से पहचाना जाता था। यही कारण है कि Thomason, Falkland, Sahib, Sultan और Sindh जैसे नाम आज भी भारतीय रेलवे के इतिहास में सम्मानपूर्वक लिए जाते हैं।

इन इंजनों ने न केवल भारत में रेल परिवहन की शुरुआत की, बल्कि देश के औद्योगिक विकास, व्यापार और सामाजिक परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रारम्भिक दौर में इंजन को नाम क्यों दिए जाते थे?

उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में रेलवे एक नई तकनीक थी। उस समय किसी रेलवे कंपनी के पास बहुत कम संख्या में इंजन होते थे। प्रत्येक इंजन की अपनी अलग पहचान होती थी, इसलिए उन्हें विशेष नाम दिए जाते थे। ये नाम कभी किसी ब्रिटिश अधिकारी, कभी किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व, तो कभी किसी स्थान या सांस्कृतिक प्रतीक पर आधारित होते थे।

बाद में जब लोकोमोटिव की संख्या तेजी से बढ़ी, तब वर्ग (Class) और संख्या (Number) आधारित पहचान प्रणाली अधिक व्यावहारिक हो गई।

भारतीय रेलवे में लोकोमोटिव को नाम देने की परंपरा का इतिहास

 भारतीय रेलवे का इतिहास केवल ट्रेनों, स्टेशनों और रेल मार्गों तक सीमित नहीं है। इस इतिहास का एक अत्यंत रोचक पक्ष उन लोकोमोटिव (रेल इंजनों) का भी है, जिन्हें विशेष नाम दिए जाते थे। आज अधिकांश रेल इंजन केवल अपने वर्ग (Class) और संख्या (Loco Number) से पहचाने जाते हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब प्रत्येक महत्वपूर्ण इंजन का अपना एक नाम होता था। ये नाम केवल पहचान के लिए नहीं, बल्कि उस समय की संस्कृति, राजनीति, तकनीकी उपलब्धियों और सामाजिक भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व करते थे।

उन्नीसवीं शताब्दी में जब भारत में रेलवे का विस्तार प्रारम्भ हुआ, तब इंजनों की संख्या बहुत कम थी। प्रत्येक इंजन को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए उसे नाम दिया जाता था। धीरे-धीरे यह परंपरा भारतीय रेलवे की पहचान बन गई। बाद के वर्षों में कई इंजनों का नाम महान व्यक्तियों, ऐतिहासिक घटनाओं, नदियों, पौराणिक पात्रों तथा राष्ट्रीय प्रतीकों पर रखा गया। यही कारण है कि आज भी Fairy Queen, Sahib, Sultan, Sindh, Deshbandhu, Lokmanya, Navbharati और Baaz जैसे नाम रेलवे इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं।

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध नामित लोकोमोटिव: Fairy Queen से Navbharati तक का इतिहास

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध नामित लोकोमोटिव (Named Locomotives): इतिहास, परंपरा और पूरी जानकारी

भारतीय रेलवे के इतिहास में केवल ट्रेनों के नाम ही नहीं, बल्कि अनेक लोकोमोटिव (इंजन) भी अपने विशिष्ट नामों के कारण प्रसिद्ध रहे हैं। आज अधिकांश इंजन केवल उनके वर्ग (जैसे WAP-7, WAG-9, WDG-4) और संख्या से पहचाने जाते हैं, परन्तु एक समय ऐसा था जब इंजनों को विशेष नाम देकर उनकी अलग पहचान बनाई जाती थी।

इन नामों में इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रीय भावना, महान व्यक्तित्व, नदियाँ, पौराणिक पात्र, वीरता, तकनीकी उपलब्धियाँ और भारतीय अस्मिता की झलक दिखाई देती है। कुछ इंजन ब्रिटिश अधिकारियों के नाम पर रखे गए, जबकि स्वतंत्रता के बाद अनेक इंजनों को भारतीय महापुरुषों और राष्ट्रीय प्रतीकों के नाम दिए गए। यह परंपरा विशेष रूप से 19वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक अधिक प्रचलित रही।

Oct 17, 2025

दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क (2025)

दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क (2025):

रेलवे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की यात्रा प्रणाली की रीढ़ होती है। दुनिया में कई देशों ने अपने विशाल रेल नेटवर्क से न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि विकास की दिशा भी तय की है। आइए जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क वाले देशों के बारे में।

1. संयुक्त राज्य अमेरिका (United States)

  • कुल लंबाई: लगभग 2,50,000 किमी

  • अमेरिका का रेल नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा है। यह मुख्य रूप से माल (freight) परिवहन के लिए प्रयोग किया जाता है।

Oct 11, 2025

जानिए रेलवे से जुड़े 45 फैक्ट

 

1. इतिहास और शुरुआत

भारत में ट्रेन का इतिहास 168 साल से अधिक पुराना है। पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चली थी। यह यात्रा 34 किलोमीटर लंबी थी और इसमें लगभग 400 यात्री सवार थे।

2. भारतीय रेलवे की अहमियत

भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवाओं में से एक है और यह भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है।

3. नेटवर्क का आकार

  • कुल पटरियों की लंबाई: लगभग 1.21 लाख किलोमीटर

  • रोज चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें: लगभग 13,000

  • पूरे देश में रेलवे स्टेशन: 7,349

4. कर्मचारियों की संख्या

भारतीय रेलवे में लगभग 13 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। ये ट्रैक मेंटेनेंस, संचालन, स्टेशन प्रबंधन और प्रशासन में लगे हुए हैं।

5. विद्युतीकरण

देशभर में लगभग 49% रेलवे रूट विद्युतीकृत हो चुके हैं, जिससे ऊर्जा की बचत और यात्रा की गति बढ़ी है।

6. सबसे धीमी ट्रेन

जानिए रेलवे से जुड़े 45 फैक्ट

1. इतिहास और शुरुआत

भारत में ट्रेन का इतिहास 168 साल से अधिक पुराना है। पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चली थी। यह यात्रा 34 किलोमीटर लंबी थी और इसमें लगभग 400 यात्री सवार थे।

2. भारतीय रेलवे की अहमियत

भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवाओं में से एक है और यह भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है।

3. नेटवर्क का आकार

  • कुल पटरियों की लंबाई: लगभग 1.21 लाख किलोमीटर

  • रोज चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें: लगभग 13,000

  • पूरे देश में रेलवे स्टेशन: 7,349

4. कर्मचारियों की संख्या

भारतीय रेलवे में लगभग 13 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। ये ट्रैक मेंटेनेंस, संचालन, स्टेशन प्रबंधन और प्रशासन में लगे हुए हैं।

5. विद्युतीकरण

देशभर में लगभग 49% रेलवे रूट विद्युतीकृत हो चुके हैं, जिससे ऊर्जा की बचत और यात्रा की गति बढ़ी है।

6. सबसे धीमी ट्रेन

‘मेट्टुपलायम-ऊटी नीलगिरी पैसेंजर’ केवल 10 किमी प्रति घंटा की गति से चलती है। यह ट्रेन इतनी धीमी है कि यात्री चलती ट्रेन से आसानी से उतर और चढ़ सकते हैं।

7. सबसे लेटलतीफ ट्रेन

‘गोवाहाटी-त्रिवेन्द्रम एक्सप्रेस’ अक्सर 10–12 घंटे लेट चलती है।

8. विशेष स्टेशन

  • राज्य सीमा पर स्टेशन: नवापुर (आधा महाराष्ट्र, आधा गुजरात)

  • सबसे बड़े नाम वाला स्टेशन: वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा

  • सबसे छोटे नाम वाला स्टेशन: ईब

9. दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म

गोरखपुर स्टेशन का प्लेटफॉर्म 1366.33 मीटर लंबा है।

10. खूबसूरत स्टेशन

लखनऊ का चारबाग स्टेशन व्यस्ततम और खूबसूरत स्टेशनों में शामिल है।

11. ट्रेनों में शौचालय

1909 में ओखिल चंद्र सेन के पत्र के बाद ब्रिटिश सरकार ने ट्रेनों में टॉयलेट की व्यवस्था शुरू की।

12. सबसे बड़ी रेल सुरंग

पीर पंजाल में 11.215 किलोमीटर लंबी सुरंग भारत की सबसे बड़ी रेल सुरंग है।

13. सबसे लंबी ट्रेन यात्रा

विवेक एक्सप्रेस डिब्रूगढ़ (असम) से कन्याकुमारी तक 4,273 किलोमीटर की यात्रा करती है।

14. सबसे ज्यादा स्टॉप वाली ट्रेन

हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस के 115 स्टॉप हैं।

15. सबसे कम दूरी वाला स्टेशन जोड़

नागपुर और अजनी के बीच केवल 3 किलोमीटर दूरी है।

16. पहली पटरी

जगन्नाथ शंकरसेठ और जमशेदजी जीजीभाई ने पहली रेल पटरी बिछाई।

17. रेलवे का मैस्कॉट

भारतीय रेलवे का मैस्कॉट ‘भोलू’ नामक हाथी है।

18. कंप्यूटराइज्ड रिजर्वेशन

1986 में नई दिल्ली से आरंभ हुआ।

19. विशेष रिकार्ड

नई दिल्ली के मेन स्टेशन में दुनिया का सबसे बड़ा रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम है।


2024–2025 की नई उपलब्धियाँ

20. वंदे भारत एक्सप्रेस

देश में अब 136 नई वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही हैं, जिनकी अधिकतम गति 160 किमी प्रति घंटा है।

21. नर्मदा एक्सप्रेस

अहमदाबाद और मुंबई के बीच 130 किमी/घंटा की गति से चलती है।

22. नई रेल सुरंगें

जम्मू-कश्मीर में USBRL टनल 50, 12.775 किलोमीटर लंबी, उधमपुर और श्रीनगर को जोड़ती है।

23. पंबन ब्रिज

तमिलनाडु में नया वर्टिकल लिफ्ट रेलवे पुल, मंडपम और रामेश्वरम को जोड़ता है।

24. रेलवे विश्वविद्यालय

वडोदरा में गति शक्ति विश्वविद्यालय, परिवहन और लॉजिस्टिक्स में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देता है।

25. डिजिटल नेटवर्क सुरक्षा

रेलवे ने अपने डिजिटल नेटवर्क की साइबर सुरक्षा को मजबूत किया है।

26. रेलवे पुल और पुनर्निर्माण

मदुरै रेलवे डिवीजन ने पुराने कबाड़ का पुनः उपयोग करके 12 फीट ऊँचा और 5 फीट चौड़ा मंदिर का गोपुरम बनाया।

भारतीय रेलवे – भविष्य की योजनाएँ और नई पहल (2025–2026)

27. हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट

भारत की पहली हाई-स्पीड रेल, मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर, 320 किमी/घंटा की गति से चलने वाली ट्रेन के लिए तैयार की जा रही है। इसके संचालन से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग 3 घंटे 15 मिनट हो जाएगा। भविष्य में दिल्ली–वाराणसी, चेन्नई–बेंगलुरु और अहमदाबाद–जयपुर रूट पर भी हाई-स्पीड रेल चलाने की योजना है।

28. स्मार्ट स्टेशन पहल

भारतीय रेलवे स्मार्ट और डिजिटल स्टेशनों की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

  • प्रमुख स्टेशनों में सौर ऊर्जा से चलने वाले स्टेशन, वाई-फाई सुविधा और स्मार्ट टिकटिंग मशीनें लगाई जा रही हैं।

  • नई पहल के तहत स्टेशनों पर स्मार्ट सुरक्षा कैमरे, डिजिटल सूचना बोर्ड और ऑटोमेटिक ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लगाए जा रहे हैं।

29. विद्युतीकरण और ग्रीन रेल

  • 2030 तक भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क को पूर्ण रूप से विद्युतीकृत करना चाहता है।

  • सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए ट्रेन डिपो और स्टेशन पर ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्रीन स्टेशन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।

  • इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी और रेलवे शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में बढ़ेगा।

30. वंदे भारत 2.0

  • 2025 में वंदे भारत 2.0 ट्रेनें शुरू की गई हैं, जिनमें यात्रा को और आरामदायक बनाने के लिए लागत-कुशल तकनीक, एरोडायनामिक डिज़ाइन और स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है।

  • इन ट्रेनों की गति 180–200 किमी/घंटा तक बढ़ाई जा रही है।

31. नई रेल लाइन्स और कनेक्टिविटी

  • उत्तर-पूर्वी राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों में नई रेल लाइनों का निर्माण तेज़ी से हो रहा है।

  • इससे असम, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

32. शहरी और मेट्रो रेल विस्तार

  • बड़े शहरों में मेट्रो और उपनगरीय रेल नेटवर्क को मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए कई इंटीग्रेटेड स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है।

  • इसका उद्देश्य यात्रियों को स्टेशन से स्टेशन अधिक तेज़ और सुविधाजनक तरीके से जोड़ना है।

33. डिजिटल टिकटिंग और एप्स

  • भारतीय रेलवे का नया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म यात्रियों को मोबाइल टिकट, QR-कोड एंट्री और सीट अपग्रेडेशन जैसी सुविधाएँ देता है।

  • भविष्य में पूरी बुकिंग प्रक्रिया AI आधारित प्रिडिक्शन और स्मार्ट सिफ़ारिशों के साथ पूरी होगी।

34. सुरंग और पुल परियोजनाएँ

  • हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में नई सुरंगें और पुल बनाकर यात्रा को सुरक्षित और तेज़ बनाया जा रहा है।

  • उदाहरण: जम्मू–कश्मीर में USBRL टनल नेटवर्क का विस्तार, उत्तराखंड में रिवर ब्रिज परियोजनाएँ।

35. यात्री अनुभव में सुधार

  • ट्रेन के अंदर Wi-Fi, स्मार्ट लाइटिंग, पॉवर पॉइंट और मनोरंजन सुविधा प्रदान की जा रही है।

  • स्टेशनों पर एसी लाउंज, स्मार्ट कैफेटेरिया और ऑटोमेटिक सफाई सिस्टम लगाए जा रहे हैं।

भारतीय रेलवे – 2025–2030 की भविष्य की योजनाएँ और विकास

36. भारत का पूर्ण हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

  • 2030 तक भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

  • मुंबई–अहमदाबाद के बाद दिल्ली–वाराणसी, चेन्नई–बेंगलुरु, अहमदाबाद–जयपुर और कोलकाता–पटना जैसे मुख्य रूटों पर हाई-स्पीड ट्रेनें चलेंगी।

  • इन रूटों पर गति 320–350 किमी/घंटा तक होगी।

37. स्मार्ट और ग्रीन स्टेशन योजना

  • देशभर के प्रमुख और मीडियम स्टेशनों को स्मार्ट स्टेशन में बदलने की योजना है।

  • इसमें शामिल हैं:

    • ऊर्जा की बचत के लिए सौर और पवन ऊर्जा सिस्टम

    • डिजिटल सूचना बोर्ड, स्मार्ट टिकटिंग और स्मार्ट सुरक्षा कैमरे

    • यात्रियों के लिए आरामदायक लाउंज, कैफेटेरिया और साफ-सफाई की ऑटोमेटिक सुविधा

38. विद्युतीकरण और पर्यावरणीय पहल

  • 2030 तक भारतीय रेलवे का उद्देश्य पूरा नेटवर्क विद्युतीकृत करना है।

  • डीजल इंजन के स्थान पर इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल बढ़ेगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य के करीब होगा।

  • हर नए स्टेशन और डिपो में ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा।

39. वंदे भारत और नई तेज़ ट्रेनों का विस्तार

  • 2025–2030 तक वंदे भारत 3.0 और 4.0 ट्रेनें परिचालन में लायी जाएँगी।

  • इनमें यात्रियों के लिए एरोडायनामिक डिज़ाइन, स्मार्ट ब्रेकिंग सिस्टम और AI आधारित यात्री सुविधा होगी।

  • गति 200–220 किमी/घंटा तक बढ़ाई जाएगी।

40. उत्तर-पूर्व और पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी

  • असम, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में नई रेल लाइनों का निर्माण तेज़ी से होगा।

  • हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग और पुल परियोजनाएँ यात्रा को सुरक्षित और तेज़ बनाएंगी।

  • इससे व्यापार और पर्यटन में वृद्धि होगी।

41. डिजिटल और AI आधारित रेलवे नेटवर्क

  • रेलवे की सभी टिकटिंग और बुकिंग सेवाएँ कंप्लीट डिजिटल और AI आधारित होंगी।

  • यात्री एप्स पर सीट प्रिडिक्शन, स्मार्ट रूट सुझाव और QR कोड एंट्री जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

42. शहरी और मेट्रो रेल इंटीग्रेशन

  • शहरों में मेट्रो और उपनगरीय नेटवर्क को मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए इंटीग्रेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे।

  • यात्रियों को स्टेशन से स्टेशन तेज़ और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

43. रेलवे संग्रहालय और सांस्कृतिक पहल

  • भारतीय रेलवे के इतिहास और विरासत को संरक्षित करने के लिए नए संग्रहालय और थीम पार्क बनाए जाएंगे।

  • पुराने इंजन और ट्रेनों को संरक्षण और प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा।

44. यात्री अनुभव और सुरक्षा में सुधार

  • ट्रेन में Wi-Fi, स्मार्ट लाइटिंग, पॉवर पॉइंट और मनोरंजन सुविधा उपलब्ध होगी।

  • स्टेशनों पर ऑटोमेटिक सफाई, स्मार्ट टिकटिंग, डिजिटल सूचना और सुरक्षा कैमरे होंगे।

45. भविष्य की रेलवे लॉजिस्टिक्स और फ्रेट नेटवर्क

Oct 10, 2025

35 interesting facts about India Railways

1. भारतीय रेल की ऐतिहासिक शुरुआत (16 अप्रैल 1853)

भारत में रेल सेवा की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को हुई, जब देश की पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर (वर्तमान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई) से ठाणे के बीच चली। यह लगभग 33.6 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। इस ट्रेन को तीन भाप इंजन — Sahib, Sindh और Sultan — खींच रहे थे। इसमें 14 डिब्बे थे, जिनमें लगभग 400 यात्री सवार थे। यह घटना इतनी ऐतिहासिक थी कि उस दिन बंबई में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। यही यात्रा आगे चलकर भारत के आर्थिक और औद्योगिक विकास का आधार बनी।

2. एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क

1951 में राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) के बाद से भारतीय रेल (Indian Railways) आज एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एकल प्रबंधन वाला नेटवर्क बन चुका है।
यह लगभग 65,000 मार्ग किलोमीटर (Route km) और 1,15,000 ट्रैक किलोमीटर (Track km) पर फैला है। प्रतिदिन लगभग 12,600 यात्री ट्रेनें चलती हैं, जो 7,172 स्टेशनों को जोड़ती हैं।
हर दिन लगभग 2.3 करोड़ यात्री यात्रा करते हैं — यानी भारत प्रतिदिन ऑस्ट्रेलिया की पूरी जनसंख्या को रेल द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है।

Aug 21, 2023

जानिए भारत में कब चली पहली ट्रेन

भारत में हर रोज करीब 2.50 करोड़ लोग ट्रेन से सफर करते है. इसके साथ 203.88 मिलियन टन माल की ढुलाई की जाती है. लेकिन इसकी नीव यानी इसे शुरू किसने किया था. आइए जानते है.

भारतीय रेलवे का इतिहास 170 साल पुराना है. जो आज भी डेवलपमेंट के साथ-साथ आगे बढ़ रहा है, भारत में हर रोज हजारों ट्रेन संचालित की जाती है. जिसमें करोड़ों की संख्या में लोग सफर करते हैं. यह संख्या ऑस्ट्रेलिया देश की आबादी के बराबर है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, भारत में रेल चलाने की कल्पना सबसे पहले किस सख्श के मन में आया और रेलवे के जनक कौन है?

भारत में सबसे पहली पैसेंजर ट्रेन 1853 में चलाई गई थी जबकि योजना 1837 से ही बनाई जा रही थी. सबसे पहली ट्रेन रेड हिल्स से मद्रास के चिंताड्रिपेट्र पुल तक मालगाड़ी के रूप में चलाए गए थे जिसका मुख्य उद्देश्य था कि अंग्रेज भारत से लाभ कमा सके. जिसका श्रेय लॉर्ड डलहौजी को जाता है. क्योंकि लॉर्ड डलहौजी ब्रिटिश शासन काल के गवर्नर थे और उन्होंने भारत में कई कानून बनाएं.

Dec 28, 2022

Revised Organizational Structure of Railway Board

Revised Organizational Structure of Railway Board

i) Chairman, Railway Board & Chief Executive Officer - (CEO & CRB), ii) Member (infrastructure), Railway Board- (M/lnfra), iii) Member {Traction & Rolling Stock (T&RS)}, Railway Board -(M/TRS), iv) Member {Operations & Business Development (O&BD)}, Railway Board - (M/O&BD,) and v) Member (Finance), Railway Board- (MF)

 
Broad Distribution of work to be handled by the Board Members
Chairman Railway Board & Chief Executive Officer(CEO)- CRB
  • HR
  • Safety
  • Security
  • Health
  • Planning Infrastructure
  • Vigilance
  • Efficiency & Research
  • Public Relations
  • Heritage
  • Secretary's Branches
  •  Transformation Cell & •
  • Corporate Co-ordination.
Member (Infrastructure), Railway Board-  M/Infra.
  • Works,
  • Civil Engineering
  • Bridges
  • Signal & Telecom
  • Land & Amenities
  • Station Development &
  • Railway Electrification
Member {Traction & Rolling •  Stock(TRS)},Railway Board -  M/TRS  
  • Production Units
  • Mechanical Workshops
  •  Coaches
  • Locomotives
  • Train sets
  • Environment and House Keeping
  • Electrical Maintenance of Coaching Stock
  • Traction Distribution
  • Power Supply &
  •  Renewable Energy
  •  Materials Management
Member {Operations & Business Development(O&BD)},  Railway  Board- M/O&BD
  •  Traffic Transportation
  •  Coaching
  • Tourism & Catering
  • Commercial
  • Non-Fare Revenue
  •  Marketing & Business Development &
  • IT.
Member (Finance). Railway  Board- MF
  • Accounts
  • Finance
  • Budget
  • Revenue,
  • Stat. & Econ &
  • Economic Unit.

Aug 13, 2022

18 interesting facts about India Railways

18 interesting facts about India Railways

1) Indian Railways started its service 161 years ago on 16 April 1853 when the first passenger train was run over a stretch of 33 kilometres from Mumbai to Thane. The train with 14 railway carriages, carrying around 400 guests, left Bori Bunder at 3:30 p.m. that day. It was declared a public holiday then.
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2) Nationalised in 1951, Indian Railways is today the largest rail network in Asia and the world’s second largest network operated under a single management. It has 115,000 km of track length. It runs 12,617 trains to carry over 23 million passengers daily – equivalent to moving the entire population of Australia – connecting more than 7,172 stations.
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3) Railways runs more than 7,421 freight trains carrying 3 million tonnes (MT) of freight every day. It has entered a select club of railways that includes China, Russia and USA in carrying more than one billion tons of freight annually. Indian Railways has over 239,281 freight wagons, 59,713 passenger coaches and 9,549 locomotives.
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4) A separate budget for the Railways has its genesis in the recommendations of the 10-member Acworth Committee in 1920-21, headed by British railway economist William Acworth. Following his report, the railway finances of India were separated from the general government finances in 1924.
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5) In the post-Independence era, railways accounted for 75% of public transport and 90% of freight. Hence, the need for a separate budget. Today, in contrast, the share has reduced to 15% and 30%.
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6) The first live telecast of railway budget took place on 24 March 1994. Lalu Prasad Yadav, who remained Railway Minister from 2004 to May 2009 presented the railway budget six times in a row.
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7) In 2000, Mamata Banerjee, who is the current Chief Minister of West Bengal, became the first woman Railway Minister. In 2002, she also became the first female railway minister to present the railway budget. Additionally, she holds the record of being the only woman who presented the railway budget for two different governments in the centre (NDA and UPA).
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8) India’s fastest train has successfully completed a trial run at 160 km per hour. In a few months, with the rollout of the first semi-high speed train, passengers will be able to travel between Delhi and Agra in just 90 minutes, cutting the journey time by 30 minutes.
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9) The New Delhi-Bhopal Shatabdi is currently the fastest train on the Indian Railways network. It reaches a maximum speed of 150 kmph on the Faridabad-Agra section. The Metupalayam-Ooty Nilgiri Passenger train, which runs at an average speed of 10 kmph, is the slowest train.
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10) The New Delhi Railway Station has secured a place in the Guinness Book of Records for having the world’s largest Route Relay Interlocking System. This system is put to use where multiple tracks are interlocked. It helps divert train movements during periods of high traffic volumes.
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11) With over 1.4 million employees on its rolls, Indian Railways is the world's seventh largest employer after the US Department of Defence, the Chinese Army, Wal-Mart, China National Petroleum, State Grid of China and British Health Service, according to The Economist.
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12) The renovated platform at Gorakhpur Railway Station in Uttar Pradesh has become the world's longest, measuring 1,366 meter. Until recently, Kharagpur in West Bengal was the longest platform at 1,072 meter, followed by State Street Center subway station in Chicago at 1,067meter.
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13) Indian Railways is building the world’s highest railway bridge-five times the height of Qutub Minar and 35 meters taller than Eiffel Tower. It will come up over the Chenab river on the under construction rail link to the Kashmir Valley. The bridge will rise 359 meters over the Chenab on the Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link Project. Currently, the world’s tallest rail bridge runs over France’s Tarn river.
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14) Indian Railways’ longest tunnel is Pir Panjal that links Kashmir Valley with Banihal in Jammu. It runs for a distance of over 11.2 km. The train with the longest route is Vivek Express. Running between Dibrugarh and Kanyakumari, it covers 4,286 km in around 82 hours and 30 minutes.
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15) Toilets were introduced on Indian Railways in 1909, more than half a century after the start of operations. Indian Railways started computerized reservation in New Delhi in 1986.
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16) Station with the shortest name is Ib in Odisha. Venkatanarasimharajuvariipeta is the station with the longest name (29 letters). This is sometimes spelled with 'Sri' prefixed.
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17) Four sites of Indian Railways have been declared as “World Heritage sites” by the UNESCO. These are Darjeeling, Himalayan Railway inscribed in 1999, Mumbai CST Building inscribed in 2004, Neelgiri Mountain Railways inscribed in 2005 and Kalka-Shimla Railways inscribed in 2008.
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18) The Fairy Queen, plying between New Delhi and Alwar in Rajasthan, is the oldest functioning steam engine in the world. It has been listed in the Guinness Book of World Records and has also received the Heritage Award from the International Tourist Bureau, Berlin.
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Aug 12, 2022

Railway Timetables 1839 - Bradshaw’s

While the necessity of a national timetable was obvious, it raised one fundamental and thorny question: what time is it?
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The 1830s saw a boom in railway building in England, as local companies seized their chance to establish themselves within a burgeoning national rail network. A national timetable, however, did not appear until this weekend in 1839. Bradshaw's Railway Time Tables, which included train times for both the north and south along with an "Assistant to Railway Travelling with Illustrative Maps and Plans", aimed to rein in rampant confusion within an uncoordinated system. "The necessity of such a work is so obvious as to need no apology," wrote Bradshaw in the introduction.
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In 1839, time was set locally according to the sun, so when a train left London at 6pm it was already 6.05pm in Oxford
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But while the necessity of a national timetable was obvious, it raised one fundamental and thorny question: what time is it? Back then, time was set locally according to the sun, so when a train left London at 6pm it was already 6.05pm in Oxford. One local railway guide of the era included an addendum indicating the number of minutes to be added or subtracted en route, so Tring was "2m slower than Euston" but "5m faster than Birmingham". Prior to the railway era, these differences weren't much of an issue. But now, travellers found that their watches were hopelessly unsynchronised.
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In November 1840 the Great Western Railway imposed Greenwich Mean Time (GMT) on its stations, and by September 1847 "Railway Time" was used across the network. As a consequence, local time was no more. By 1855, 98 per cent of British towns were using GMT.
Source - independent
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Dec 6, 2021

A brief history of Indian railway

 
  A narrow-gauge steam loco built in 1889 by Atlas Works of Sharp Stewart & Co. Ltd for the Darjeeling Himalayan Railway. Attached to it is a first-class coach that ran between Siliguri and Darjeeling before it was brought here
A drawing room and a bedroom in the salon car
Howrah: The Rail Museum near Howrah station has got a makeover over the past four months, making it one of the must-go places in the city.
From a 129-year-old steam loco to a coach of one of the first Metro rakes, all the exhibits have got a facelift.
The interiors of a metre-gauge inspection carriage, built by the Junagarh Workshop. The carriage is a wooden structure and has bogie wheels. The two rear windows are for the inspectors to see the condition of the tracks
A four-wheel broad-gauge salon car built by the Carriage and Wagon Workshop in Liluah in 1911
The open-air museum, spread across five acres off the Foreshore Road connector, less than a kilometre from the station, was opened in 2006. The museum has 19th-century steam locomotives, carriages, salon cars and other vintage exhibits that show how the railways have evolved over the years.
All the exhibits have got a fresh coat of paint. Some of them had broken parts or missing components, which have been replaced. A layer of grass has been laid on the ground and LED lights have been installed.
One of the oldest exhibits — a hand-operated crane built in 1859 at Oldbury, an industrial town in West Midlands, England. The one-tonne capacity crane was used at the loco unit in Katwa
A lathe machine powered by steam engine, built by H.W. Ward & Co, Birmingham, in 1908. It was one of the items found lying unattended during the renovation
The broad-gauge steam locomotive belonged to the erstwhile East Pakistan Railways. It entered the Indian territory during the 1971 Liberation War and was captured by the Indian Army. It was kept at the Bandel yard before being brought to the museum
During the renovation, four items were found lying unkempt. A lathe machine powered by steam engine, more than 100 years old, was one of them. “These items are priceless. Many of them are worthy of a Sotheby’s auction,” a railway official said.
“We plan to turn it into an interactive museum, one that is entertaining, engaging and educational. Our main target will be children. If they come, they will bring adults along,” said Manu Goel, the divisional railway manager of Howrah, who supervised the revamp.
The museum is open from 10.30am to 5.30pm every day, barring Thursday. The authorities plan to extend the closing time.
The driver’s cabin of one of the first Metro rakes
The sprawling museum compound with the Howrah bridge in the background
Source - Telegraph India
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1st EMU service from the then Bombay VT to Kurla

On 3.2.1925,1st EMU service with 4-cars flagged off by Sir Leslie Wilson from the then Bombay VT to Kurla

 
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Dec 3, 2021

Great rail journeys that exist only in fantasy

Trans-Siberian railway
 
A rail tunnel has opened under the Bosphorus, offering tantalising possibilities for rail anoraks, writes Tom de Castella.
"Anything is possible on a train," wrote Paul Theroux in the Great Railway Bazaar, "a great meal, a binge, a visit from card players, an intrigue, a good night's sleep, and strangers' monologues framed like Russian short stories."
For fans of great train journeys the possibilities have just magnified. A rail tunnel has opened under the Bosphorus, the strait separating Europe from Asia.
Turkey's prime minister, Recep Tayyip Erdogan, who opened the new line, declared it would connect "London to Beijing".
The Turkish PM was perhaps getting caught up in the moment. At the moment it's a suburban railway linking both sides of Istanbul. And there's a much easier way to get to China - the Trans-Siberian Railway from Moscow to Beijing.
A rail trip across Asia via Istanbul is intriguing though, says Mark Smith, founder of website The Man in Seat 61. Once bits of engineering work in Turkey are finished, you'll be able to board a train at St Pancras and - after a few connections - alight about 10 days later in Bangladesh. That's if you're not assassinated by bandits in southern Iran or al-Qaeda in Pakistan, he adds.
The Bosphorus tunnel offers other intriguing possibilities. Since the late 19th Century there's been a plan to build a railway between Cairo and Cape Town. There are now railways between Nairobi and Cape Town. If Africa's northern section was built, one could hop on a train in London, and via Istanbul, Syria - remember this is a train lover's utopian vision - and Egypt, reach the Cape some time later.
The longest journey Smith has done is Moscow to Vladivostok, which takes seven days. "Even I was going a bit stir crazy by the end. There's an awful lot of birch trees."
Changing scenery is a must, says Matthew Engel, author of Eleven Minutes Late. So is interesting company. On that score Amtrak in the US wins, he says.
Outside the densely populated north east, few Americans use the trains. "The people who do are a little bit, sometimes very, eccentric. And enormous fun." The trains are notoriously slow - "40 plus" hours from Chicago to LA. "It's like being on a cruise ship except no-one is boring."
Source..BBC

Nov 26, 2021

50 साल तक भारतीय ट्रेनों में नहीं होते थे टॉयलट,जाने कैस हुई थी पहल

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भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। आज से ठीक 164 साल पहले यानी 16 अप्रैल 1853 को देश की पहली ट्रेन की शुरुआत हुई थी। परन्तु करीब 50 साल तक भारतीय ट्रेनों में टॉयलट नहीं होते था।
 वह तो भला हो ओखिल चंद्र सेन नामक एक यात्री का, जिन्होंने 1909 में पैसेंजर ट्रेन से यात्रा के अपने बुरे अनुभव के बारे में साहिबगंज रेल डिविजन के ऑफिस को एक खत लिखकर लेकर बताया। इस करारे पत्र के बाद ब्रिटिश हुकूमत को यह खयाल आया कि ट्रेनों में टॉयलट की बहुत आवश्यकता है। यह पत्र आज भी भारतीय रेल संग्रहालय में मौजूद है। इस ट्रेन को चलाने का पूरा श्रेय ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (जीआईपी रेलवे) को जाता है, जिसका स्वतंत्रता के बाद नाम बदलकर सेंट्रल रेलवे कर दिया गया।

Apr 16, 2021

बुलेट ट्रेन तक पहुंचा स्टीम इंजन की छुकछुक से शुरू हुआ सफर, जानें भारतीय रेल का इतिहास

उम्र 168 साल, लेकिन सेवा का जज्बा बेमिसाल। इतनी उम्र के बावजूद कभी न थकी न रुकी।ये है अपनी भारतीय रेल।पिछले वर्ष भले ही मानवता के हित में यात्री ट्रेनों के पहिये थमे, पर माल ढुलाई जारी रही। भाप के इंजन से शुरू हुआ सफर आज बुलेट ट्रेन तक पहुंचने वाला है। तमाम हेरिटेज व डीलक्स ट्रेनों के जरिये रेलवे ने सेवा एवं सुविधा के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। कहना गलत न होगा कि भारतीय रेल दिनोंदिन जवां हो रही है।

16 अप्रैल 1853 को देश में पहली यात्री रेलगाड़ी मुंबई में बोरी बंदर से ठाणे तक चली थी। 14 डिब्बों वाली रेलगाड़ी को 21 तोपों की सलामी दी गई थी और इसमें 400 यात्रियों ने यात्रा की थी। इसे तीन लोकोमोटिव सिंधु, साहिब और सुल्तान (इंजन) से चलाया गया था। इसने 34 किमी का सफर तय किया था। भारतीय रेलवे वर्तमान में सेमी बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।

14 अप्रैल 1952 को हुई थी उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की स्थापना

उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की स्थापना 14 अप्रैल 1952 को हुई थी। पूर्वोत्तर रेलवे पहले तिरहुत रेलवे के नाम से जाना जाता था। कभी छोटी लाइनों के नाम से प्रसिद्ध यह रेलवे अब लगभग ब्राडगेज में परिवर्तित हो गया है। बरेली जंक्शन, उत्तर रेलवे के मुरादाबाद व पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल का प्रतिनिधत्व करता है। 125 जोड़ी ट्रेनें सामान्य दिनों में उत्तर रेलवे तो 30 जोड़ी ट्रेनें पूर्वोत्तर रेलवे की यहां से चलती है। यहां के एक से चार प्लेटफार्म मुरादाबाद मंडल तो पांच व छह नंबर प्लेटफार्म इज्जतनगर मंडल में आते हैं।

सैकड़ो वर्षों का इतिहास समेटे है इज्जत नगर मंडल

सैकड़ों वर्षो का इतिहास समेटे पूर्वोत्तर रेलवे का इज्जतनगर मंडल उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ ही उत्तराखंड को भी जोड़ता है। बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, कासगंज, मथुरा, फर्रुखाबाद, एटा, कन्नौज, कानपुर, कानपुर देहात, टनकपुर, काठगोदाम समेत उत्तराखंड के कई जिलों एवं शहरों को जोडऩे वाला मीटरगेज अब ब्राडगेज में बदल चुका है।

1906 में शुरू हुआ था संचालन

पूर्वोत्तर रेलवे के 88 स्टेशन परिक्षेत्र वाले इज्जतनगर मंडल से 1906 में ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ था। मीटरगेज पर ट्रेनें दौड़ाने वाले इस रेल मंडल ने पीलीभीत- मैलानी और शाहजहांपुर-पीलीभीत रूट को छोड़कर 2018 तक अन्य रूटों को ब्राडगेज में परिवर्तित कर दिया था। 2021 में ये दोनों रूट भी ब्राडगेज होने के बाद मीटरगेज लाइन इतिहास में दर्ज हो जाएगी। इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि समय के साथ रेलवे ने बदलाव किया है। भाप के इंजन से शुरू हुआ सफर अभी इलेक्ट्रानिक इंजन तक पहुंच चुका है। जल्द ही बुलेट ट्रेन में भी लोग सफर कर सकेंगे।

Source - Jagran

May 12, 2020

100 साल पुराने किऊल पुल की हो गई 'विदाई' !

पूर्वी भारत को पश्चिमी भारत को जोड़ने वाला 100 साल पुराना किऊल पुल बंद हो गया। इसके पास ही बने नए पुल से ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ कर दिया गया है। अंग्रेजों के जमाने में बने इस पुल कई खामियां आ गई थी, जिस कारण ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ने लगा था। पूर्व-मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया, "इस पुराने पुल को रविवार को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया जबकि नए पुल पर ट्रेनों का आवागमन प्रारंभ कर दिया गया है।"

उन्होंने बताया, "रविवार को किऊल-लखीसराय पुल होकर स्टाफ स्पेशल गुजरी, इस प्रकार इस ऐतिहासिक पुल से गुजरने वाली यह अंतिम रेल सेवा बनी। 100 वषों से भी अधिक अवधि के दौरान इस पुल से अनगिनत यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के गुजरने तथा करोड़ों यात्रियों के जीवन का छोटा सा हिस्सा बनने के साथ यह पुल रेलवे की लंबी विकास यात्रा का साक्षी रहा है। अपनी स्मरणीय यात्रा के बाद अब यह पुल भारतीय रेल के गौरवशाली अतित का एक हिस्सा बन गया।"

पुराना किऊल पुल अपने आप में कई महत्वपूर्ण यादों को समेटे हुए है। पूर्वी भारत को पश्चिमी भारत से जोड़ने में अपना अहम योगदान देते हुए 100 वर्ष से भी अधिक इस पर सफलतापूर्वक ट्रेनों का परिचालन होता रहा। काफभ् पुराना पुल हो जाने के कारण इसमें कई खामियां आ गई थीं जिससे सुरक्षा के ²ष्टिकोण से ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ने लगा था। पिछले काफी दिनों से इस पुल पर ट्रेनों का परिचालन नियंत्रित गति के साथ अत्यंत ही सावधानीपुर्वक किया जा रहा था। सुरक्षा के दृष्टिकोण से बड़ी मालगाड़ियों का परिचालन स्थगित कर दिया गया था।

रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि किऊल -लखीसराय स्टेशन के बीच इस पुल के अप लाइन के गर्डर का निर्माण द हार्सले कंपनी लिमिटेड टिपटॉन, इंगलैंड द्वारा तथा डाउन लाइन के गर्डर का निर्माण डोरमान लांग एंड कंपनी को-लिमिटेड द्वारा किया गया था। पिछले वषों में पुल में खराबी आने के बाद मेसर्स बुल्डवर्थ को इस पुल के मरम्मत कार्य की जिम्मेवारी सौंपी गई। 35 क्रस गर्डर तथा कुछ अन्य कार्य के बाद अप एवं डाउन लाइन पर 20 किलोमीटर प्रतिघंटा गति से ट्रेन परिचालन के लायक कार्य पूरा हो गया।

इसके बाद मेसर्स रावर्टसन द्वारा मरम्मत कार्य की अनुमति दिए जाने के बाद अप एवं डाउन के शेष बचे गर्डर के बदलने सहित पुल संबंधी अन्य कार्य पूरे किए गए। वर्ष 2016 में अप लाइन पर 30 किलोमीटर प्रतिघंटा तथा डाउन लाइन पर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की नियंत्रित गति से ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ किया गया था।

राजेश कुमार कहते हैं, "पुराने किऊल ब्रिज की खराब होती स्थिति तथा रेल परिवहन से संबंधित भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए पुराने किऊल रेल पुल के समानांतर एक नए रेल पुल का निर्माण गया। अब नए पुल के शुरू हो जाने से सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब इस पुल से ट्रेनों का परिचालन अधिकतम 110 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की गति से किया जा सकेगा।"

Source - Uttam Hindu
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