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Jul 29, 2026

Posting & Tenure of Vigilance / Investigating / Enquiry Inspectors on Zonal Railways

 1. Posting of officials in the Vigilance Organisation of the Zonal Railways should be made in consultation with the CVO concerned.

2. These posts have been kept as tenure posts. The normal period of tenure should be 4 years which could be extended upto 6 years in individual cases meriting such a consideration by the GM of the concerned Railway/ Production Unit etc. based on the recommendation of the concerned CVO.

Jul 16, 2026

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध डीजल लोकोमोटिव एवं उनके नाम: इतिहास, महत्व और विशेषताएँ

भारतीय रेलवे में डीजल लोकोमोटिव का युग 1950 के दशक के उत्तरार्ध में प्रारम्भ हुआ। स्टीम इंजनों की तुलना में डीजल इंजन अधिक शक्तिशाली, किफायती और रखरखाव की दृष्टि से सरल थे। धीरे-धीरे इन्होंने अधिकांश रेल मार्गों पर स्टीम इंजनों का स्थान ले लिया और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डीजल युग के प्रारम्भिक वर्षों में कुछ महत्वपूर्ण लोकोमोटिवों को विशेष नाम भी दिए गए। इनमें से अनेक नाम भारत के महान नेताओं, राष्ट्रीय प्रतीकों, वीरता, शक्ति तथा तकनीकी उपलब्धियों से प्रेरित थे। कुछ नाम किसी नए लोकोमोटिव वर्ग के प्रथम इंजन को दिए गए, जबकि कुछ समय के साथ पूरे वर्ग की पहचान बन गए।

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव एवं उनके नाम: इतिहास, महत्व और विशेषताएँ

विद्युतीकरण (Electrification) ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। स्टीम इंजनों के बाद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ने तेज़ गति, अधिक शक्ति, कम रखरखाव और पर्यावरण के प्रति बेहतर प्रदर्शन के कारण रेलवे संचालन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इन इंजनों में से कई ऐसे भी थे जिन्हें केवल उनके लोको नंबर से नहीं, बल्कि विशेष नामों से जाना गया।

इन नामों में राष्ट्रीय नेताओं, महान व्यक्तित्वों, तकनीकी उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक भारत की प्रगति की झलक दिखाई देती है। कुछ नाम किसी नए लोकोमोटिव वर्ग के प्रथम इंजन को दिए गए, जबकि कुछ विशेष उपलब्धियों के उपलक्ष्य में रखे गए।

भारतीय रेलवे के प्रसिद्ध स्टीम लोकोमोटिव एवं उनके नाम: इतिहास, महत्व और रोचक तथ्य

 स्टीम लोकोमोटिव भारतीय रेलवे के स्वर्णिम युग की पहचान माने जाते हैं। लगभग एक शताब्दी तक भाप के इंजन भारतीय रेल परिवहन की रीढ़ रहे। इसी दौर में अनेक इंजनों को विशेष नाम दिए गए, जो केवल पहचान का माध्यम नहीं थे, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, तकनीकी उपलब्धियों और रेलवे की गौरवशाली परंपरा के प्रतीक भी बने।

इनमें कुछ नाम ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर आधारित थे, कुछ राष्ट्रीय भावनाओं से प्रेरित थे और कुछ ऐसे भी थे जो किसी विशेष उपलब्धि या रेलवे की तकनीकी प्रगति का प्रतिनिधित्व करते थे। आज भी रेलवे इतिहास के अध्ययन में इन नामित इंजनों का विशेष महत्व है।

Fairy Queen: भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे पुराने चालू स्टीम इंजनों में से एक

भारतीय रेलवे का इतिहास अनेक गौरवशाली उपलब्धियों से भरा हुआ है, लेकिन यदि किसी एक स्टीम लोकोमोटिव ने विश्व स्तर पर भारतीय रेल को विशेष पहचान दिलाई है, तो वह है Fairy Queen। यह केवल एक रेल इंजन नहीं, बल्कि भारत की औद्योगिक विरासत, इंजीनियरिंग कौशल और रेलवे इतिहास का जीवंत प्रतीक है।

लगभग डेढ़ शताब्दी से अधिक पुराना यह स्टीम इंजन आज भी रेलवे प्रेमियों, इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी ऐतिहासिक महत्ता और संरक्षित अवस्था के कारण Fairy Queen को विश्व के सबसे पुराने परिचालन योग्य (Operational) स्टीम लोकोमोटिवों में गिना जाता है।

Fairy Queen का परिचय

Fairy Queen का निर्माण वर्ष 1855 में इंग्लैंड की प्रसिद्ध कंपनी Kitson, Thompson & Hewitson द्वारा किया गया था। उस समय भारत में रेलवे का विस्तार प्रारम्भिक अवस्था में था और नई-नई रेल लाइनों पर स्टीम इंजन चलाए जा रहे थे।

यह इंजन ईस्ट इंडियन रेलवे (East Indian Railway) के लिए बनाया गया था और प्रारम्भिक वर्षों में यात्री तथा हल्की मालगाड़ियों के संचालन में उपयोग किया गया।

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