भारतीय रेलवे में डीजल लोकोमोटिव का युग 1950 के दशक के उत्तरार्ध में प्रारम्भ हुआ। स्टीम इंजनों की तुलना में डीजल इंजन अधिक शक्तिशाली, किफायती और रखरखाव की दृष्टि से सरल थे। धीरे-धीरे इन्होंने अधिकांश रेल मार्गों पर स्टीम इंजनों का स्थान ले लिया और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डीजल युग के प्रारम्भिक वर्षों में कुछ महत्वपूर्ण लोकोमोटिवों को विशेष नाम भी दिए गए। इनमें से अनेक नाम भारत के महान नेताओं, राष्ट्रीय प्रतीकों, वीरता, शक्ति तथा तकनीकी उपलब्धियों से प्रेरित थे। कुछ नाम किसी नए लोकोमोटिव वर्ग के प्रथम इंजन को दिए गए, जबकि कुछ समय के साथ पूरे वर्ग की पहचान बन गए।
