महकती आबोहवा...चमचमाती फर्श...छत से गायब जाले और अफसरों के मुस्कराते चेहरे। रायपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जीएम गौतम बनर्जी जोन के आला अधिकारियों के साथ वार्षिक निरीक्षण के लिए रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। जीएम के निरीक्षण की तैयारी पिछले माह से ही चल रही थी। स्टेशन पर रंग-रोगन करने के साथ टूटी चेयर और फर्श तक बदल दी गई थी। प्लेटफार्म नंबर एक पर शुक्रवार को पूरे दिन सफाई चलती रही, क्योंकि जीएम साहब को कुछ गड़बड़ न नजर आए। लेकिन जीएम साहब स्टेशन का निरीक्षण किए बिना ही निकल गए, तब जाकर अधिकारियों के जान में जान आई। जीएम से इस दौरान पत्रकारों ने यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे, लेकिन जीएम सिर्फ आश्वासन देकर निकल गए।
ज्ञात हो कि रायपुर रेलवे स्टेशन से एक दिन में 112 गाड़ियां गुजरती है और 70 हजार यात्री सफर करते हैं। शुक्रवार को स्टेशन पर सफाई तो चकाचक थी, लेकिन प्लेटफार्म क्रमांक दो के कुछ हिस्से के रेलवे ट्रैक की हालत बेहद नाजुक है। इस प्लेटफार्म से गाड़ी गुजरते ही ट्रैक करीब एक फीट नीचे चला जाता है। ट्रैक का यह हिस्सा पानी से डूबा जाता है। ट्रैक पर हमेशा पानी भरा रहता है। ट्रैक की हालत देखकर ऐसा लग रहा जैसे सालों से ट्रैक की मरम्मत नहीं हुई है। यदि रेलवे प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लेगा तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना से नकारा नहीं जा सकता है। रेलवे प्रशासन उसकी सुध नहीं ले रहा है। पिछले कई दिनों से सिर्फ स्टेशन के रंगरोगन में ही लगा था।
इन जगहों पर रेलवे ने कराया रंग रोगन
रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के बाहर शौचालय, स्टेशन के शेड पर लगे लोहे के स्ट्रक्चर तथा छत का रंग-रोगन कराया। पुलिस स्टेशन की ड्यूब लाइट सुधारी गई। वीआइपी गेट पर लगे कांच की सफाई, अधिकारियों के कमरे की सफाई कर चकाचक किया गया। प्लेटफार्म क्रमांक एक पर रखे जाने वाले पार्सल को भी अधिकारियों ने जीएम के आने के पहले हटवा दिया था। मंडल के अधिकारियों का मकसद था कि जीएम को किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए। स्टेशन की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था देखकर यात्रियों का कहना था कि काश जीएम हर 15 दिन में आते तो स्टेशन इसी तरह चकाचक रहता।
Source - Nai Duniya

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