? ऑफिस गीता ?
हे पार्थ,
|| तुम अकेले आये थे, ऑफिस में अकेले जाओगे; अस्तु स्टाफ की कमी का रोना न रोओ। अकेले ही युद्ध करो||
||तुम बेवजह अधिक काम करने से हुई गलतियों के लिए प्राप्त दंडों का पश्चाताप मत करो ||
|| तुम अगले प्रमोशन की चिंता भी मत करो ||
|| बस अपनी करंट ड्यूटी से ही प्रसन्न रहो ||
|| तुम जब नहीं थे, तब भी ये ऑफिस चल रहा था ||
|| तुम जब नहीं होगे, तब भी ये ऑफिस चलता रहेगा ||
|| जो काम आज तुम्हारा है, कल किसी और का था ||
|| वो कल किसी और का होगा ||
|| तुम इसे अपना समझ कर मगन हो रहे हो ||
|| यही तुम्हारे समस्त दुखों का कारण है ||
|| प्रमोशन, इन्क्रीमेंट, छुट्टी, पेंशन जैसे शब्द अपने मन से निकाल दो
फिर तुम ऑफिस के और ये ऑफिस तुम्हारा होगा ।।
???
Source - WhatsApp

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