विद्युतीकरण (Electrification) ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। स्टीम इंजनों के बाद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ने तेज़ गति, अधिक शक्ति, कम रखरखाव और पर्यावरण के प्रति बेहतर प्रदर्शन के कारण रेलवे संचालन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इन इंजनों में से कई ऐसे भी थे जिन्हें केवल उनके लोको नंबर से नहीं, बल्कि विशेष नामों से जाना गया।
इन नामों में राष्ट्रीय नेताओं, महान व्यक्तित्वों, तकनीकी उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक भारत की प्रगति की झलक दिखाई देती है। कुछ नाम किसी नए लोकोमोटिव वर्ग के प्रथम इंजन को दिए गए, जबकि कुछ विशेष उपलब्धियों के उपलक्ष्य में रखे गए।
भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का विकास
भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का इतिहास 1925 में मुंबई क्षेत्र में 1500 वोल्ट डीसी (DC) प्रणाली से शुरू हुआ। बाद में 25 केवी एसी (25 kV AC) प्रणाली अपनाई गई और धीरे-धीरे पूरे देश में विद्युतीकरण का विस्तार हुआ।
इसी अवधि में WCM, WCG, WCAM, WAM, WAG तथा WAP जैसे अनेक लोकोमोटिव वर्ग विकसित हुए। इनमें से कई इंजनों को विशेष नाम दिए गए, जो आज रेलवे इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
DC एवं AC/DC श्रेणी के प्रमुख नामित लोकोमोटिव
Sir Roger Lumley
GIP Railway के अंतिम यात्री डीसी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव EA-1 (बाद में WCP-1) को Sir Roger Lumley नाम दिया गया था। यह मुंबई क्षेत्र के प्रारम्भिक विद्युतीकरण काल का महत्वपूर्ण इंजन था।
Sir Leslie Wilson
EF-1 (बाद में WCG-1) श्रेणी के पहले मालगाड़ी इलेक्ट्रिक इंजन को Sir Leslie Wilson नाम दिया गया। इसका निर्माण 1928 में हुआ और इसने मुंबई क्षेत्र में माल परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Bluebird
WCM-2 क्रमांक 20188 को अनौपचारिक रूप से Bluebird कहा जाता था। यह लंबे समय तक प्रसिद्ध Deccan Queen एक्सप्रेस का प्रमुख इंजन रहा। इसकी विशेष रंग-सज्जा (Livery) के कारण यह रेलवे प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय था।
Lokmanya
भारतीय रेलवे का पहला स्वदेशी डिज़ाइन एवं निर्मित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव WCM-5 क्रमांक 20083 था, जिसे Lokmanya नाम दिया गया।
यह भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जाता है।
Vallabh
1975 में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) द्वारा निर्मित प्रथम WCAM-1 लोकोमोटिव को Vallabh नाम दिया गया। यह ड्यूल-पावर (AC/DC) तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण था।
Balwant
WCAM-2 श्रेणी के पहले लोकोमोटिव (क्रमांक 21861) को Balwant नाम दिया गया। बाद में यह नाम WCAM-2 वर्ग के लिए एक पहचान जैसा बन गया।
Karamvir
1996 में निर्मित प्रथम WCM-6 लोकोमोटिव का नाम Karamvir रखा गया। यह डीसी ट्रैक्शन के अंतिम चरण की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
AC Electric Locomotives (WAM एवं WAG)
Jagjivan Ram
1959 में निर्मित प्रथम WAM-1 लोकोमोटिव को Jagjivan Ram नाम दिया गया। यह भारतीय रेलवे के प्रारम्भिक एसी विद्युत युग का महत्वपूर्ण इंजन था।
Bidhan
1963 में निर्मित प्रथम स्वदेशी WAG-1 लोकोमोटिव का नाम Bidhan रखा गया। यह भारतीय इंजीनियरिंग और स्वदेशी निर्माण क्षमता का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
Nouvion
WAG-5A लोकोमोटिव क्रमांक 23141 का नाम Nouvion रखा गया। यह नाम फ्रांस के रेलवे अभियंता Fernand Nouvion के सम्मान में दिया गया, जिन्होंने 25 kV AC ट्रैक्शन प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Shantidan
1992 में निर्मित प्रथम WAG-7 लोकोमोटिव (क्रमांक 27001) का नाम Shantidan रखा गया। इसका नामकरण मदर टेरेसा द्वारा किया गया था, जिससे यह भारतीय रेलवे के सबसे चर्चित इलेक्ट्रिक इंजनों में शामिल हो गया।
Swarnabha
Swarnabha भारतीय रेलवे के 2500वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का नाम था। यह WAG-7 श्रेणी का इंजन था और भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण अभियान की एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक बना।
Navyug
1998 में निर्मित प्रथम स्वदेशी WAG-9 लोकोमोटिव (क्रमांक 31022) को Navyug नाम दिया गया। यह उच्च क्षमता वाले आधुनिक मालगाड़ी इंजनों के नए युग की शुरुआत का प्रतीक था।
Navjyoti
दूसरे स्वदेशी WAG-9 लोकोमोटिव को Navjyoti नाम दिया गया। इसके बाद Navdisha, Navashakti, Navoday, Navashatak तथा Nav Pragati जैसे प्रेरणादायक नाम भी WAG-9 श्रेणी के इंजनों को दिए गए।
WAP श्रेणी के प्रसिद्ध नामित लोकोमोटिव
Pragatisheel
उच्च गति के लिए विकसित WAP-1 के विशेष संस्करण को Pragatisheel नाम दिया गया। यह रेलवे की बढ़ती गति और तकनीकी विकास का प्रतीक था।
Baba Saheb
WAP-1 क्रमांक 22021 को Baba Saheb नाम दिया गया। यह डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में रखा गया था।
Sukanya
1991 को अंतरराष्ट्रीय बालिका वर्ष के उपलक्ष्य में WAP-1 क्रमांक 22017 का नाम Sukanya रखा गया।
Rajhans
Rajhans नाम WAP-1 और बाद में WAP-4 दोनों श्रेणी के इंजनों पर देखने को मिलता है। यह भारतीय रेलवे के सबसे लोकप्रिय नामों में से एक है।
Ashok
1994 में निर्मित प्रथम WAP-4 लोकोमोटिव का नाम Ashok रखा गया।
Swarnanjali
Swarnanjali नाम WAP-4 क्रमांक 22242 को दिया गया। यह भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण नामित इलेक्ट्रिक इंजनों में गिना जाता है।
Chetak
WAP-4 क्रमांक 22382 का नाम Chetak रखा गया। महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े के नाम पर रखा गया यह नाम साहस और गति का प्रतीक माना जाता है।
Navkiran
प्रथम WAP-7 लोकोमोटिव (क्रमांक 30201) का नाम Navkiran रखा गया। यह भारतीय रेलवे के आधुनिक उच्च गति यात्री इंजनों के नए युग का प्रतीक बना।
Navbharati
दूसरे WAP-7 लोकोमोटिव को Navbharati नाम दिया गया। इसके बाद यह नाम भारतीय रेलवे की आधुनिक तकनीकी प्रगति का प्रतीक बन गया।
प्रमुख नामित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव – संक्षिप्त सूची
| नाम | वर्ग | विशेषता |
|---|---|---|
| Lokmanya | WCM-5 | पहला स्वदेशी डिज़ाइन |
| Jagjivan Ram | WAM-1 | पहला WAM |
| Bidhan | WAG-1 | पहला स्वदेशी WAG |
| Shantidan | WAG-7 | पहला WAG-7 |
| Navyug | WAG-9 | पहला स्वदेशी WAG-9 |
| Navkiran | WAP-7 | पहला WAP-7 |
| Ashok | WAP-4 | पहला WAP-4 |
| Vallabh | WCAM-1 | पहला WCAM-1 |
| Balwant | WCAM-2 | पहला WCAM-2 |
| Bluebird | WCM-2 | Deccan Queen का प्रसिद्ध इंजन |
भारतीय रेलवे के नामित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव केवल शक्तिशाली मशीनें नहीं थे, बल्कि वे भारतीय रेल के आधुनिकीकरण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय प्रगति के प्रतीक भी थे। Lokmanya, Bidhan, Shantidan, Navyug, Navkiran और Navbharati जैसे नाम भारतीय रेलवे के विकास के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आज भले ही अधिकांश इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव केवल उनकी संख्या और वर्ग से पहचाने जाते हों, लेकिन इन नामित इंजनों ने भारतीय रेलवे के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। रेलवे इतिहास के अध्ययन में इनका महत्व सदैव बना रहेगा।

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