हमारे मुल्क के सार्वजनिक शौचालयों में दो बातें कॉमन हैं. एक, गंदगी. दूसरा, दीवारों पर लिखी बेहूदी बातें. झारखंड के उत्तम सिन्हा दूसरी वाली गंदगी साफ करते हैं. वो ट्रेन के टॉयलेट, पब्लिक टॉयलेट्स के अंदर लिखी बेहूदी लाइनें, अश्लील तस्वीरें मिटाते हैं. ताकि, किसी सभ्य आदमी को वो गंदगी देखकर झेंपना न पड़े.
बेटी ने पूछा था, पापा… ट्विंकल तोमर सिंह. अंग्रेजी की टीचर होने के अलावा ब्लॉगर भी हैं. उनकी फेसबुक वॉल पर हमें उत्तम सिन्हा की जो कहानी मिली, वो आपको सुना रहे हैं. झारखंड के धनबाद में गांधी नगर इलाका है. यहां रहते हैं उत्तम सिन्हा. तकरीबन एक साल पहले की बात है. उत्तम, उनकी पत्नी अपर्णा और आठ साल की बेटी वर्षा ट्रेन के रास्ते हावड़ा से धनबाद वापस आ रहे थे. कोलफील्ड एक्सप्रेस थी. रास्ते में वर्षा ने कहा, उसे टॉयलेट जाना है. उत्तम उसे लेकर गए. वर्षा बाहर आई, तो उसने पापा से सवाल किया-
पापा, ट्रेन के टॉयलेट की दीवारों पर फोन नंबर के साथ जो लिखा है उसका क्या मतलब है?
क्या जवाब देते बेटी को, बस टॉयलेट में घुसकर घटिया बातें मिटा आए बेटी के सवाल पर उत्तम झेंप गए. क्या बताते बच्ची को? कि लोग अपनी तमाम कुंठा, सारी फ्रस्ट्रेशन उन दीवारों पर उड़ेल आते हैं. कि कुछ लोग सेक्स को लेकर इतने बीमार होते हैं कि पब्लिक टॉयलेट की दीवार पर स्त्री-पुरुष के जननांग बनाकर उन्हें हाई मिलता है. अपने प्राइवेट पार्ट का साइज़ बताकर, उसके साथ अपना नंबर लिखकर उन्हें परम सुख मिलता है. कई बार किसी लड़की के नाम के साथ घटिया बातें और उसका फोन नंबर लिख देते हैं. उत्तम ने बेटी से बस इतना कहा, कि गंदे लोग गंदी बातें लिख जाते हैं. फिर वो शौचालय के अंदर गए. और उन्होंने वहां दीवार पर लिखी घटिया चीजों को मिटा दिया.
…ताकि फिर किसी को झेंपना न पड़े इसके बाद से इस काम को उत्तम सिन्हा ने अपना मिशन बना लिया. वो सार्वजनिक शौचालयों की ये गंदगी मिटाते हैं. ट्रेन, पार्क, सरकारी दफ़्तर, बस स्टैंड, होटल, हर जगह के टॉयलेट की दीवारें साफ करते हैं. अब तक वो 250 से ज़्यादा ट्रेनों की शौचालयों में दीवारों पर लिखी गंदगी मिटा चुके हैं. गालियां मिटाने के बाद उत्तम वहां एक कागज़ चिपकाते हैं. इस पर लिखा होता है-
उत्तम सिन्हा की खबर हमें ‘दैनिक भास्कर’ में भी मिली. इसके मुताबिक, बिहार के रहने वाले उत्तम धनबाद में रहकर कपड़े का कारोबार करते हैं. बिजनस के काम से अक्सर सफर करना पड़ता है. ट्रेन से जाते हैं, तो टॉयलेट में झांकना नहीं भूलते. वहां लिखी अश्लील बातें मिटाते हैं. बाकी जगहों के पब्लिक टॉयलेट्स में भी उनका ये मिशन जारी है.
उत्तम जैसे लोग कितने प्यारे हैं. इतना जतन करके इस दुनिया को प्यारा बनाने पर तुले हैं. ऐसों के ही थामे उम्मीद थमी है दुनिया की.
Source - The lallan Top

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