गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के टकराव के बाद अब देश के भीतर चीनी कंपनियों के खिलाफ अभियान भी तेज हो गया है. चीनी कंपनियों को देश के बाहर का रास्ता दिखाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. रेल मंत्रालय के तहत आने वाले डैडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में सिगनलिंग का जो काम चीनी कंपनियों को दिया था, उसका ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि डीएफसी ने कहा है कि खराब प्रदर्शन के चलते कंपनी का ठेका रद्द किया जा रहा है.
एक तरफ चीनी सामान के खिलाफ देश में अभियान तेज हो रहा है. तमाम व्यापारी संगठन चीनी सामान का बायकाट करने का अभियान शुरू कर चुके हैं तो दूसरी तरफ जो चीनी कंपनियां भारत में काम कर रही उनके खिलाफ भी अभियान और तेज हो सकता है. सिग्नल संचार से जुड़ी और भी चीनी कंपनियों के ठेके रद्द किए जाएंगे.
इससे पहले, सरकार ने BSNL को निर्देश दिया था कि 4जी सिस्टम के अपग्रेडेशन के लिए किसी भी चीनी कंपनियों के बनाए उपकरण का इस्तेमाल न किया जाए. सूत्रों के मुताबिक संचार मंत्रालय ने कहा कि टेंडर को नए सिरे से जारी किए जाएं. संचार मंत्रालय BSNL के साथ- साथ प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों को भी निर्देश देगा कि वो चीन की कंपनियों पर निर्भरता कम करे. सरकार के सूत्रों के मुताबिक कि चीन की कंपनियों के उपकरणों के नेटवर्क की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं.
चीन की हरकत पर देश में गुस्सा चीन की हरकत पर देश में गुस्सा है. दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया गया. चीन के सामान के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया. मुंबई में चीन का विरोध किया गया. चीन के बने सामानों की होलिका जलाई गई. लोगों ने चीन के बने सामानों को बहिष्कार की अपील की. कर्नाटक के हुबली में चीन का विरोध किया गया. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीर को फाड़कर गुस्सा जाहिर किया. देहरादून में लोगों ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीर जलाई. चीन के सामान के बहिष्कार की अपील की और चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की.
Source - Zee News

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