HIGHLIGHTS
- मोदी कैबिनेट ने रेलवे आधुनिकीकरण की 7 परियोजनाओं को मंजूरी दी।
- 11,000 किमी हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को चार-लेन में बदला जाएगा।
- दिल्ली-मुंबई सहित प्रमुख रूटों पर यातायात सुगम होगा।
देश के व्यस्ततम रेल मार्गों पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या एवं माल ढुलाई के दबाव को देखते हुए रेलवे अपनी क्षमता में व्यापक विस्तार करने जा रहा है।
देश के सात हाई-डेंसिटी रेल कारिडोर को चरणबद्ध तरीके से फोर लेन बनाने की तैयारी है। जाहिर है कि इससे ट्रेन की स्पीड भी बढ़ेगी। 11 हजार किलोमीटर लंबे इन सातों कारिडोर पर रेलवे के कुल ट्रैफिक का लगभग 40 प्रतिशत संचालित होता है।
इनमें दो हजार किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन क्षमता पहले ही तैयार हो चुकी है। पांच हजार किलोमीटर के लिए मंजूरी दी जा चुकी है। बाकी हिस्सों को भी चरणबद्ध तरीके से चार लाइन वाला बनाया जाना है। इन्हीं व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने बुधवार को नौ राज्यों में आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के लिए 20,804 करोड़ रुपये मंजूर किए।
इनसे रेलवे नेटवर्क में कुल 1196 किलोमीटर की अतिरिक्त ट्रैक क्षमता विकसित होगी। इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन कॉरिडोर की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी ज्यादा सुगम बनाया जा सकेगा। इससे ट्रेनों की गति और समय में सुधार होगा तथा रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी।
इन परियोजनाओं की मंजूरी को रेलवे की क्षमता बढ़ाने की बड़ी रणनीति के दो हिस्सों के रूप में देखा जा रहा है। इसका लक्ष्य व्यस्त मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों के बीच क्षमता का दबाव घटाना, नई ट्रेनों के लिए रास्ता बनाना और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
कैबिनेट से स्वीकृत आठ परियोजनाओं में तीन बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़ी हैं। इनपर करीब 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 656 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता बनेगी। इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन एवं बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं।
ये खंड कोयला, सीमेंट, लौह-अयस्क एवं इस्पात की ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनसे हर वर्ष करीब 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बनेगी। करीब 4790 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
दक्षिण में पांच परियोजनाओं पर 10 हजार करोड़
दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना से जुड़ी पांच योजनाओं के लिए करीब 10,021 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे करीब 540 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता विकसित होगी। इनमें अरक्कोनम-रेनिगुंटा तीसरी-चौथी लाइन (77 किमी), व्हाइटफील्ड-बांगरपेट तीसरी-चौथी लाइन (47 किमी), होसुर-ओमालूर दोहरीकरण (147 किमी), सलेम-करूर-डिंडीगुल दोहरीकरण (159 किमी) और सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट मल्टीट्रैकिंग (110 किमी) शामिल हैं।
तिरुपति, कोडाइकनाल, होगेनक्कल, मेट्टूर बांध, होसुर, कोलार और यादगिरिगुट्टा जैसे पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
आठों परियोजनाओं से हर वर्ष 7.4 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी। इससे कोयला, सीमेंट, इस्पात, कंटेनर, आटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी वस्तुओं की तेज आवाजाही होगी।
ये सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर होंगे फोर-लेन
सरकार के इस व्यापक क्षमता विस्तार कार्यक्रम में दिल्ली-हावड़ा, मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई रेल मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों पर यात्री ट्रेनों के अलावा कोयला, लौह-अयस्क, सीमेंट, इस्पात, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक वस्तुओं की भारी ढुलाई होती है।