भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ यात्रियों को इनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाती है. इसके अलावा भारतीय रेलवे ने 1.4 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार दिया हुआ है. इस प्रकार यह दुनिया के सबसे बड़े रोजगार दाताओं में से एक भी है. भारतीय रेलवे के पास आकार के हिसाब से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है. मार्च 2017 तक यहाँ पर ट्रैक की कुल लंबाई 121,407 किलोमीटर थी.
रेल की पटरियों के बीच छोटे-छोटे पत्थर बिछाए जाने का कारण
रेल की पटरियों के बीच छोटे-छोटे पत्थर बिछाए जाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण हैl शुरूआती दौर में रेलवे ट्रैक का निर्माण इस्पात (steel) और लकड़ी के पटरों की मदद से किया जाता था, लेकिन आज के समय में लकड़ी के पटरों के बदले सीमेंट की आयताकार सिल्लियों का प्रयोग किया जाता है, जिसे “स्लीपर्स” कहा जाता हैl
दरअसल जब ट्रेन चलती है तो उससे जमीन और पटरियों में कंपन पैदा होता है। इसके अलावा तेज धूप से पटरियां फैलती हैं और सर्दियों में सिकुड़ती हैं। इससे ट्रेन का पूरा भार लकड़ी या सीमेंट की सिल्लियों पर आ जाता है, लेकिन पटरियों के बीच पत्थर बिछे होने के कारण सारा भार इन पत्थरों पर चला जाता हैl जिसके कारण कंपन, पटरियों का सिकुड़ना, ट्रेन का भार सभी संतुलित हो जाते हैंl
रेल की पटरियों के बीच पत्थर बिछाने के पीछे एक कारण यह भी है कि यदि पत्थर नहीं बिछाई जाती है तो रेलवे पटरी के आस पास झाड़िया उग जाएंगी जिससे ट्रेन को गुजरने में कठिनाई उत्पन्न होगीl
आपकी जानकारी के लिए हम बताना चाहते हैं कि भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क हैl 2015-16 के अंत में जारी आकड़ों के अनुसार भारतीय रेलवे नेटवर्क 66,687 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और इसके अंतर्गत 7,216 स्टेशन तथा 1,19,630 किमी ट्रैक शामिल हैl
Source - Jagran